‘जिंदगी का मजा खट्टे में ही है’ दिलजले फिल्म का ये डाइलॉग आपने सुना ही होगा और जब खट्टे की बात हो रही हो तो नींबू की याद आ ही जाती है। रोजमर्रा की जिंदगी में नींबू का इस्तेमाल अधिक होता है। हम लोग नींबू का रस निकालने या फिर उसे पूरी तरह से निचोड़ने के लिए स्क्वीज़र का इस्तेमाल करते हैं। वैसे नींबू को हम हाथ से निचोड़ सकते हैं, लेकिन लेमन स्क्वीज़र ने हमारी ज़िंदगी और आसान कर दी है। अब बात करते हैं नींबू निचोड़ने वाली मशीन लेमन क्वीजर की। आज ही के दिन (8 दिसंबर) लेमन क्वीजर को पेटेंट कराया गया था। तो आज हम आपको बता रहे हैं नींबू स्क्वीज़र के आविष्कारक और इससे जुड़ी दिलचस्प बातें। 

जॉन थॉमस ने किया था आविष्कार

नींबू निचोड़ने वाली मशीन (लेमन स्क्वीज़र)  का आविष्कार जॉन थॉमस वाइट नाम के एक अफ्रीकी अमेरिकी ने 8 दिसंबर 1896 को किया था। 1896 में ही जॉन थॉम ने लेमन स्क्वीज़र मशीन को पेटेंट करवा लिया था।

लेमन स्क्वीज़र की दिलचस्प है कहानी

लेमन स्क्वीज़र मशीन बनाने की दिलचस्प कहानी है। एक बार हुआ यूं की जॉन थॉमस को नींबू का जूस पीना था, लेकिन वे अपने हाथ से नींबू नहीं निचोड़ना चाहते थे। उनका कहना था की हाथ से नींबू निचोड़ने से हाथ गंदे हो जाते हैं और रस भी पूरा नहीं निकलता था। फिर जॉन के मन में नींबू निचोड़ने वाली मशीन बनाने का खयाल आया। 

लोकप्रिय रहा आविष्कार

जॉन थॉमस ने 8 दिसंबर 1896 को लेमन स्क्वीज़र का आविष्कार किया। जिस वक्त जॉन ने इस लेमन स्क्वीज़र का आविष्कार किया उस वक्त उनकी उम्र 68 वर्ष की थी और वह न्यूयॉर्क में रहते थे। जॉन के इस आविष्कार को लोगों ने खूब पसंद किया। इसके बाद और भी लेमन स्क्वीज़र बने, लेकिन जॉन का लेमन स्क्वीज़र काफी पॉप्युलर रहा। इसका मॉडिफाइड वर्ज़न आज लगभग हर घर में इस्तेमाल होता है।

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