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सुषमा स्वराज: एक कुशल राजनेता बनने के पीछे की पूरी कहानी
सुषमा स्वराज वर्ष 1977 में 25 साल की उम्र में कैबिनेट मंत्री बनने वालीं देश की सबसे कम उम्र की महिला नेता थीं।
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भारतीय राजनीति का सुषमा स्वराज नाम का एक सितारा 6 अगस्त को हमेशा-हमेशा के लिए डूब गया। पूर्व विदेश मंत्री और भारतीय जनता पार्टी की दिग्गज नेता सुषमा स्वराज की मंगलवार रात लगभग 11 बजकर 25 मिनट पर हार्ट अटैक होने से मौत हो गई। सुषमा स्वराज एक ऐसी सशक्त नेता थीं जिन्हें देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी काफी पसंद किया जाता था और इसका कारण उनका स्वयं का व्यक्तित्व था। विदेश में रहने वाले किसी भी भारतीय ने उनसे जब-जब मदद मांगी वो तैयार खड़ी मिलीं। सोशल मीडिया पर सबसे ज्यादा सक्रिय रहने वाली ये महिला नेता आम लोगों की समस्याएं भी वहीं सुनती थीं और उसपर त्वरित कार्यवाही करने से भी नहीं चूकती थीं। यहीं कारण है कि वो लोकप्रिय नेताओं में एक थीं।  

  • शुरुआत से ही थीं कुशल वक्ता

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    सुप्रीम कोर्ट में वकालत भी की

    सुषमा स्वराज का जन्म 14 फरवरी 1952 को हरियाणा के अंबाला छावनी में हुआ था। उन्होंने अपनी पढ़ाई भी अंबाला के एसडी कॉलेज से की थी और उसके बाद पंजाब विश्वविद्यालय चंडीगढ़ से लॉ की डिग्री ली। सुषमा स्वराज के पिता हरदेव शर्मा तथा मां लक्ष्मी देवी थीं। शुरुआत से ही सुषमा एक प्रखर बुद्धि की छात्रा थीं। उन्होंने कॉलेज में सर्वश्रेष्ठ छात्रा का सम्मान दिया गया था। वर्ष 1973 में उन्हें पंजाब विश्वविद्यालय में भी सर्वोच्च वक्ता का सम्मान मिला। इसके बाद ही उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में वकालत शुरू कर दी थी। 13 जुलाई 1975 को सुप्रीम कोर्ट के वकील स्वराज कौशल से उनका विवाह हुआ। शादी के बाद स्वराज कौशल छह साल तक राज्यसभा में सांसद रहे और मिजोरम के राज्यपाल पद पर भी रहे। सुषमा स्वराज की एक बेटी भी है जिसका नाम बांसुरी है और वे लंदन के इनर टेम्पल में वकालत कर रही हैं। 

  • कुछ ऐसा था राजनीतिक सफर

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    दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री रहीं

    इमरजेंसी का विरोध करने के बाद सुषमा ने बीजेपी पार्टी ज्वाइन कर ली। सन 1977 में उन्होंने हरियाणा के अम्बाला छावनी विधानसभा क्षेत्र से चुनाव जीता और चौधरी देवीलाल की सरकार में 1977 से 1979 तक हरियाणा की श्रम मंत्री रहीं। उन्होंने भारतीय राजनीति में सबसे कम उम्र 25 साल में कैबिनेट मंत्री बनने का रिकार्ड दर्ज किया।  वर्ष 1979 में 27 साल की उम्र में सुषमा स्वराज को हरियाणा की जनता पार्टी इकाई का प्रदेश अध्यक्ष चुना गया। भारतीय जनता पार्टी का 1980 में जब गठन किया गया तो सुषमा स्वराज भी उसमें शामिल हुईं।  वर्ष 1987 से 1990 तक वे अंबाला कैंट से एमएलए रहीं। अप्रैल 1990 में उन्हें राज्यसभा सांसद चुना गया और सन 1996 तक उच्च सदन की सदस्य रहीं। 1996 में सुषमा स्वराज ने दक्षिण दिल्ली लोकसभा क्षेत्र से चुनाव जीता। मार्च 1998 में उन्होंने दक्षिण दिल्ली संसदीय क्षेत्र से चुनाव जीता। अटल बिहारी वाजपेयी के इस कार्यकाल में वे 19 मार्च 1998 से 12 अक्टूबर 1998 तक सूचना एवं प्रसारण मंत्री के पद पर रहीं। इसके अलावा उनके पास दूरसंचार मंत्रालय की भी जिम्मेदारी थी। अक्टूबर 1998 में सुषमा स्वराज ने केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया और दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री बन गईं।


  • जब सोनिया गाँधी के खिलाफ लड़ा था चुनाव

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    देश की पहली महिला विदेश मंत्री बनीं

    वर्ष 1999 में सुषमा स्वराज ने कर्नाटक की बेल्लारी लोकसभा सीट पर कांग्रेस की तत्कालीन अध्यक्ष सोनिया गांधी के खिलाफ चुनाव लड़ा।  हालांकि वो यहां से हार गई थीं लेकिन वोट का अंतर काफी कम था। वे चुनाव प्रचार के दौरान कर्नाटक की जनता को कन्नड़ भाषा में संबोधित करती थीं। अप्रैल 2000 में वे उत्तर प्रदेश से राज्यसभा सदस्य चुनी गईं। उन्हें केंद्रीय मंत्रिमंडल में फिर सूचना और प्रसारण मंत्रालय सौंपा गया। इस पद को उन्होंने वर्ष 2000 से 2003 तक पूरी जिम्मेदारी के साथ संभाला। सन 2003 में उन्हें स्वास्थ्य, परिवार कल्याण और संसदीय मामलों का मंत्री बनाया गया। 2006 में सुषमा स्वराज मध्यप्रदेश से राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुईं। 2009 में उन्होंने मध्यप्रदेश के विदिशा लोकसभा क्षेत्र से चार लाख से ज्यादा वोटों से जीत दर्ज की। दिसंबर 2009 से मई 2014 तक वे 15 वीं लोकसभा में विपक्ष की नेता रहीं और सन 2014 में सुषमा स्वराज विदिशा लोकसभा क्षेत्र से दोबारा निर्वाचित हुईं। इसके बाद भी उन्हें देश की पहली महिला विदेश मंत्री का पद सौंपा गया। 

  • ट्विटर के जरिए करती थीं आम लोगों की मदद

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    सोशल मीडिया पर चर्चित नेताओं में एक थीं

    सुषमा स्वराज सोशल मीडिया पर सबसे ज्यादा सक्रिय रहने वाली नेताओं में एक थीं। वो ट्विटर के जरिए आम जनता की समस्याएं सुनती थीं और उसपर प्रतिक्रिया भी देती थीं। कई बार विदेश में मुश्किल में फंसे भारतीयों ने उनसे मदद की गुहार लगाई और पूर्व विदेश मंत्री ने बिना किसी देर के मदद भी की। टि्वटर पर 1.31 करोड़ फॉलोअर्स के साथ दुनिया की सबसे चर्चित महिला नेता थीं और इसके जरिए ही उन्होंने देश-दुनिया में 80 हजार लोगों की मदद की। पासपोर्ट बनवाने से लेकर छोटी-छोटी बातों की तरफ भी उनका पूरा ध्यान था। यही वजह थी एक नेता के आम जनता के बीच लोकप्रिय बनने की। मौत से तीन घंटे पहले भी उन्होंने अपने आखिरी ट्वीट में लोकसभा में अनुच्छेद-370 को समाप्त करने पर प्रधानमंत्री को बधाई दी थी।

    उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा था- 'प्रधानमंत्री जी - आपका हार्दिक अभिनन्दन, मैं अपने जीवन में इस दिन को देखने की प्रतीक्षा कर रही थी।' और इसके महज तीन घंटे बाद ही उनका निधन हो गया। 

  • महासभा के भाषण में पाकिस्तान पर गरजीं

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    ऐसी वक्ता जिनके भाषण पर बज उठती थीं तालियां

    सुषमा स्वराज जब भाषण देतीं थीं तो लोग बिना सुने नहीं रह पाते थे। एक कुशल नेता के साथ वो श्रेष्ठ वक्ता भी थीं। 29 सितंबर 2018 को संयुक्त राष्ट्र में दिया सुषमा का भाषण ख़ूब सुना गया। इसमें उन्होंने संयुक्त राष्ट्र को परिवार के सिद्धांत पर चलाने की वकालत की। उन्होंने कहा था कि पाकिस्तान के साथ कई मौक़ों पर बातचीत शुरू हुई लेकिन ये रुक गई तो उसकी वजह पाकिस्तान का व्यवहार है। सुषमा ने 2015 में भी संयुक्त राष्ट्र की महासभा में भाषण दिया था और पाकिस्तान को खूब खरी खोटी सुनाई थीं। इसी दौरान उन्होंने पाकिस्तान को 'आतंकवादी की फैक्ट्री' भी कहा था। इसी मंच से पाक प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने पाक और भारत के बीच शांति पहल का एक चार सूत्रीय प्रस्ताव रखा था, उसका उत्तर देते हुए मैं कहना चाहूंगी कि हमें चार सूत्रों की जरूरत नहीं है, केवल एक सूत्र काफी है, आतंकवाद को छोड़िए और बैठकर बात कीजिए।

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