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जानिए कहां से आई कालीमिर्च, क्या है इसकी कहानी
भारत के मसालों की खुशबू के साथ इनसे जुड़ी कहानी और इतिहास को आप तक हम पहुंचाएंगे...
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  • ये है काली मिर्च की कहानी

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    केरल में होती है सबसे ज्यादा पैदावार

    काली मिर्च का इस्तेमाल हर घर में होता है और घरेलू नुस्खों में इस्तेमाल किए जाने वाले मसालों में भी काली मिर्च सबसे अहम मसाला है। ये शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता तो बढ़ाती ही है, हवा को शुद्ध करने का भी काम करती है, लेकिन शायद आप न जानते हों कि एक ज़माने में ये काली मिर्च दुनियाभर में ताकत और पैसे का प्रतीक बनकर उभरी थी। यूरोप के लोग इसे काला सोना कहते थे। केरल का गरम और नम वातावरण सैकड़ों सालों से इसकी पैदावार के लिए आदर्श है। केरल के मालाबार तट पर काली मिर्च की सबसे ज्यादा पैदावार होती है। केरल के पहाड़ी इलाकों में काली मिर्च के मध्यम दर्जे की पत्तियों वाले पेड़ बहुतायत से हैं। वहां लोग बड़े स्तर पर इसकी खेती करते हैं। ये काम इतने बड़े पैमाने पर होता है कि गांव, शहरों और लाखों लोगों की जीविका इसी से चलती है।

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    ऊंचे-ऊंचे पेड़ों पर ये पत्तियों के साथ हरे दानों के गुच्छे के रूप में लटकती रहती है। पेड़ पर चढ़कर लोग इन गुच्छों को तोड़ते हैं और फिर पैरों या मशीनों के जरिए इन छोटे हरे दानों को अलग किया जाता है। कड़ी धूप में इन्हें कई दिन सुखाने के बाद ये स्वाद भरे काले मिर्च के रूप में आ जाते हैं। जिन इलाकों में यह काम होता है, वहां आसपास काली मिर्च की खुशबू फैली होती है। यह एयरफ्रेशनर का काम भी करती है। वातावरण को शुद्ध रखती है। काली मिर्च और सफेद मिर्च एक ही पेड़ में पैदा होती है और इन्हीं हरे दानों से प्रोसेस की जाती हैं।

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    पुरातत्व के सबूत बताते हैं कि भारत में काली मिर्च का इस्तेमाल 2000 ईसा पूर्व से होता आया है। कुछ ऐसे भी सबूत मिले हैं कि सबसे पहले भारत से मिस्र में काली मिर्च का निर्यात किया गया था,  जिसमें मिस्र के तीसरे फैरो रामसेस द ग्रेट (1303-1213 ईसा पूर्व) की ममी बनाने के दौरान उनके नाक में भरने वाले काली मिर्च के दाने भी शामिल थे।  40 ईस्वी में रोम के लोग काली मिर्च का व्यापार करते थे। उस समय जब जुलाई की मानसूनी हवाएं चलती थीं तो रोम के व्यापारी दालचीनी, खुशबू वाले तेल व काली मिर्च का व्यापार करने अलेक्जेंड्रिया की मुख्य बाज़ार में जाते थे और जब मानसून ख़त्म हो जाता था तो वापस आ जाते थे। रोम में 80 फीसदी भोजन बनाने में काली मिर्च का इस्तेमाल होता था। 


  • जब खलीफाओं ने फैलाया झूठ

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    जब 410 ईस्वी में रोम पर आक्रमण हुआ, विस्कोगोथ की घेराबंदी उठाने और शहर को बर्खास्त किए जाने से रोकने के लिए, सोना, चांदी, रेशम के साथ रोम के लोगों ने तीन हजार पाउंड काली मिर्च के लिए भी दिए। रोम की शाही सत्ता के पतन के साथ दूसरे देश के लोगों ने मसालों के व्यापार पर कब्ज़ा जमाना शुरू किया। इस्लाम के एकजुट प्रभाव के तहत, अरबों ने काली मिर्च के व्यापार में प्रभुता स्थापित कर ली। इस्लाम के शुरुआती खलीफा ने इस्लाम को पूर्वी एशिया के हिस्सों को चीन के दक्षिणी तट तक घेर लिया और वे अपने साथ इस्लाम के विश्वास... अरबी भाषा, शरीयत के नियम और साझा व्यावसायिक व्यवहार भी लेकर आए। अपने एकाधिकार को बनाए रखने के लिए, स्रोतों को गुप्त रखने के लिए और महंगे मसाले पर अपना प्रभुत्व दुनिया में फैलाने के लिए उन्होंने एक योजना बनाई। उन्होंने काली मिर्च के बारे में एक भ्रांति फैला दी कि भारत में काली मिर्च के पेड़ होते हैं और ज़हरीले सांप इन पेड़ों पर पहरा देते हैं। इसकी फसल उगाने के लिए पेड़ों को जलाना पड़ता है जिससे सांप वहां से भाग जाते हैं और इस प्रक्रिया में सफेद मिर्च काली हो जाती है। 

  • और इस तरह बढ़ा व्यापार

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    जैसे - जैसे काली मिर्च की मांग बढ़ती गई, वैसे - वैसे इसका व्यापार भी बढ़ता गया। 10वीं सदी तक काली मिर्च पूरे यूरोप में मशहूर हो गई। कुछ जगह ऐसा भी लिखा है कि अंग्रेज़ राजा इथरलेड द्वितीय (978 - 1016) जर्मनी के मसाला व्यापारियों से लंदन में काली मिर्च बेचने के लिए 10 पाउंड लेता था। मध्य युग में अरब के व्यापारियों के अलावा और भी कई समुद्र के जरिए व्यापार करने वाले समूहों ने मसालों का व्यापार शुरू कर दिया था। 14वीं शताब्दी में जेनोआ काली मिर्च के व्यापार का मुख्य केंद्र बन गया। 1367 से 1371 के बीच अलेक्जेंड्रिया से जेनोआ में दर्ज किए गए सभी मूल्यों का 40 फीसदी से अधिक काली मिर्च से आया। 

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    1572 में पुर्तगाल के कालीमिर्च व्यापार के नियंत्रण के दौरान प्रकाशित कालीकट में छपा एक चित्र

    अलेक्जेंड्रिया के व्यापारी काली मिर्च को वेनिस भी ले गए। 1497 में पुर्तगाली राजा मैनुएल ने वास्को डी गामा को भारत के समुद्री रास्ते की खोज करने के लिए भेजा ताकि वो मसालों के बारे में पता लगा सके। 15वीं सदी के आखिर तक पुर्तगालियों ने मसालों के व्यापार पर आधिपत्य जमा लिया। सन 1500 से 1600 के बीच पुर्तगालियों ने केरल के मालाबार से हर साल 20 लाख किलो मसालों का आयात किया, लेकिन पुर्तगाली उस जगह पर जहां काली मिर्च का उत्पादन होता था, राजीनितक और आधिकारिक हक जमाने में नाकाम रहे और 16वीं सदी के अंत तक उन्होंने इस व्यापार पर से अधिकार खो दिया। 17वीं शताब्दी में डच बैंटम, सीलोन, जावा, लैंपोंग और मालाबार में मसालों का व्यापार प्रमुखता से करने लगे। इसके बाद जब तराई क्षेत्रों में ब्रिटिश साम्राज्य का विस्तार होने लगा तब ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने मसालों के व्यापार पर अधिपत्य जमा लिया। 

  • ये हैं प्रमुख उत्पादक देश

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    अब वियतनाम काली मिर्च के उत्पादन में दुनिया का अग्रणी देश बन गया है। 2016 में वियतनाम ने 163 हज़ार टन काली मिर्च का उत्पादन किया। ये पूरी दुनिया में हुए काली मिर्च के उत्पादन का 34 फीसदी था। दूसरे नंबर पर इंडोनेशिया रहा, जहां 89 हज़ार टन काली मिर्च का उत्पादन हुआ है। इसके बाद भारत में (53 हज़ार टन), ब्राज़ील (42 हज़ार टन), चीन (31 हज़ार टन)  काली मिर्च का उत्पादन हुआ। 


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