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मैरी कॉम: संघर्ष की मिसाल है, देश की ये 'मिलियन डॉलर मुक्केबाज'
मैरी कॉम छठीं बार बन सकती हैं महिला वर्ल्ड बॉक्सिंग चैंपियन
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बॉक्सिंग का माना जाना नाम मैरी कॉम छठीं बार महिला वर्ल्ड बॉक्सिंग चैंपियनशिप की खिताब अपने नाम करने के लिए रिंग में उतर रही हैं। दिल्ली में चल रही चैंपियनशिप में 48 किग्रा भारवर्ग में मैरीकॉम ने जगह बना ली है। अब शनिवार को उनका मुकाबला यूक्रेन की हना ओखोटा से होगा।

  • मैरी कॉम के पंच का दम

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    महिला वर्ल्ड बॉक्सिंग चैपिंयन मैरी कॉम

    35 साल की ये सुपर मॉम आयरलैंड की दिग्गज बॉक्सर कैटी टेलर को  पीछे छोड़ चुकी हैं। फाइनल मैच में अब मैरीकॉम का एक मेडल तय है। अभी तक मैरी ने 5 गोल्ड और 1 ब्रॉन्ज अपने झोली में रखे हैं। शनिवार को फाइनल में मैरी यूक्रेन की हना ओखोटा से भिड़ेंगी। मैरीकॉम ने कहा, हम जीतें या हारें, हर मुक्केबाज इससे कुछ सीखता है। मैं अब हना को देखूंगी और उनके खेल पर ध्यान दूंगी। कोशिश करूंगी कि जीत हासिल कर सकूं।

  • संघर्ष से भरा रहा पूरा जीवन

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    मणिपुर के छोटे से गाँव में बीता बचपन।

    मैरीकॉम किसी अमीर घर से ताल्लुक नहीं रखती हैं। उनका जीवन गरीबी में बीता है। मणिपुर की रहने वाली मेरी का बचपन खेतों में काम करके बीता है। उनका खेल जगत में कदम रखना उनके पिता को भी मंजूर नहीं था। 2005 में के ओनलर कॉम से शादी के बाद मेरी ने स्पोटर्स में कदम रखा। पति के सहयोग से मेरी ने अपनी बॉक्सिंग की ट्रेनिंग शुरू की। उन्होंने अपना प्रशिक्षण एम.नरजित से लेना शुरू किया, जो मणिपुर राज्य के बॉक्सिंग कोच थे। 2007 में मेरी ने जुड़वा बच्चों को जन्म दिया लेकिन सुपर मॉम ने प्रोफेशनल और घर के बीच बैलेंस बनाए रखा और 2008 में उन्होंने वर्ल्ड टाइटल का खिताब हासिल किया। 

  • जीवन पर बन चुकी है फिल्म

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    मैरी कॉम के जीवन पर बन चुकी है फिल्म।

    2008 में इस महिला मुक्केबाज को 'मैग्नीफिशेंट मैरी कॉम' की उपाधि दी गई। देश का नाम रोशन करने वाली मैरी कॉम के जीवन पर एक फिल्म भी बन चुकी है जिसमें उनकी भूमिका अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा ने निभाई थी। मैरी पहली भारतीय महिला बॉक्सर हैं जिन्होंने अब तक 6 विश्व प्रतियोगिताओं में पदक जीते हैं। 

  • परिवार और फिटनेस

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    सुपर माॅम के नाम से भी जाना जाता है।

    मैरीकॉम को 'सुपरमॉम' के नाम से भी जाना जाता है। 35 साल की मैरीकॉम के तीन बच्चे हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने बॉक्सिंग करना नहीं छोड़ा। विरोधी पर मैरी कॉम पंच की बरसात करती हैं और बहुत ही तेजी से खुद को उनके प्रहारों से बचाती भी हैं और यही वजह है उनके ज्यादातर मुकाबले एकतरफा होते हैं। पांच बार की वर्ल्ड चैंपियन, लंदन ओलिंपिक गेम्स में ब्रॉन्ज मेडलिस्ट और एशियन गेम्स में पहला गोल्ड जीतने वाली मैरीकॉम अपनी फिटनेस के लिए कड़ी मेहनत करती हैं। 


  • कई सारे सम्मानों से नवाजा जा चुका है

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    अब तक कई अवार्ड भी जीत चुकी हैं।

    5 बार की वर्ल्ड चैंपियन भारतीय महिला मुक्केबाज एमसी मैरीकॉम भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में धूम मचा चुकी हैं। उन्हें कई अवार्ड भी मिल चुके हैं। वर्ष 2006 में पद्मश्री और 2009 में उन्हें देश के सर्वोच्च खेल सम्मान ‘राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया।


  • एल सरिता देवी को किया था मेडल समर्पित

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    एल सरिता देवी को समर्पित किया था अवार्ड।

    मैरीकॉम ने कजाकिस्तान की बॉक्सर को फ्लाईवेट (48-51 किलोग्राम वर्ग) में हराकर गोल्ड मेडल पर कब्जा किया। उन्होंने अपना मेडल एल सरिता देवी को समर्पित किया। सरिता देवी को सेमीफाइनल में हार का सामना करना पड़ा था। हालांकि मैच के दौरान वो विरोधी मुक्केबाज पर हावी रही थीं, लेकिन जजों ने दक्षिण कोरियाई बॉक्सर को विजेता घोषित किया था।

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