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अरुण जेटली का बचपन से लेकर अब तक का सफरनामा
छात्र जीवन में शुरू की थी राजनीति, ऐसे कमाया नाम, अटल और मोदी जी के थे खास।
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पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता अरुण जेटली ने शनिवार की दोपहर को एम्स में अंतिम सांस ली। उनका यहां पर 9 अगस्त से इलाज चल रहा था, उन्हें सांस लेने में तकलीफ हो रही थी, जिसकी वजह से उन्हें एम्स में भर्ती कराया गया था। उनके निधन की खबर पर पीएम नरेंद्र मोदी से लेकर विपक्ष के नेताओं ने दु:ख जताया है। बता दें छात्र जीवन से राजनीति की शुरुआत करने वाले अरुण जेटली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'संकटमोचक' रहे। उन्होंने अहम मौको पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बचाव किया और गुजरात से दिल्ली लाने में उनकी अहम भूमिका रही। आइए जानते हैं अरुण जेटली का बचपन से लेकर राजनीतिक सफरनामा।

  • दिल्ली में हुआ था जन्म

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    बचपन से लेकर अब तक की तस्वीरें

    बेहद ही सादगी और गंभीर स्वभाव के माने जाने वाले पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली का जन्म 28 दिसंबर  1952 को नई दिल्ली के नारायण विहार इलाके में हुआ था। वह सीए बनना चाहते थे और इसी तरह उन्होंने अपने कदम भी बढ़ाए थे। लाहौर से दिल्ली में आकर अरुण जेटली का परिवार बसा था। उनके पिता दिल्ली के मशहूर वकीलों में से एक थे। उनके पिता महराज किशन जेटली दिल्ली के जाने-माने वकील थे। उनकी माता रत्ना प्रभा गृहणी थी। वह समाज के लिए हमेशा ही बढ़चढ़ आगे रहती थी। उनकी दो सिस्टरें हैं। 

  • पिता थे दिल्ली के मशहूर वकील

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    बचपन में अरुण जेटली

    लाहौर से दिल्ली में आकर अरुण जेटली का परिवार बसा था। उनके पिता दिल्ली के मशहूर वकीलों में से एक थे। उनके पिता महराज किशन जेटली दिल्ली के जाने-माने वकील थे। उनकी माता रत्ना प्रभा गृहणी थी। वह समाज के लिए हमेशा ही बढ़चढ़ आगे रहती थी। उनकी दो सिस्टरें हैं। 

  • डीयू से की लॉ की पढ़ाई

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    साथियों के साथ अरुण जेटली

    बचपन से ही पढ़ने में काफी तेज रहे अरुण जेटली ने दिल्ली के श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स से इकोनॉमिक्स में स्नातक की पढ़ाई की थी। हालांकि वह सीए नहीं सकें, लेकिन अपने पिता जी की तरह ही अच्छे वकील जरूर बने। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से कानून की डिग्री ली। उनकी प्रारंभिक शिक्षा दिल्ली के सेंट जेवियर स्कूल में हुई थी। 

  • छात्र राजनीति से शुरुआत

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    जयप्रकाश नारायण के साथ जेटली

    बचपन में कुछ दूसरा सपना देखने वाले अरुण जेटली का मन राजनीति में ही लगने लगा। उन्होंने अपने राजनीति की शुरुआत छात्र जीवन से ही शुरू कर दी थी। जब उन्होंने 1973 में लोकनायक जयप्रकाश नारायण ने 'संपूर्ण क्रांति आंदोलन' की बात सुनी, तो उन्होंने बढ़चढ़कर इसमें हिस्सा लिया।

  • जेपी आंदोलन में इस समिति के रहे संयोजक

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    छात्रसंघ का चुनाव जीतने के बाद

    लोकनायक जयप्रकाश नारायण के आंदोलन में विद्यार्थी और युवा संगठनों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था। जयप्रकाश नारायण (जेपी) ने अधिक से अधिक छात्रों को आंदोलन से जोड़ने के लिए राष्ट्रीय समिति बनाई। जयप्रकाश नारायण ने जेटली की योग्यता को देखते हुए छात्रों की राष्ट्रीय समिति का संयोजक बनाया। इस दौरान आपातकाल के वक्त वह 19 महीने नजरबंद भी रहे। अरुण जेटली वर्ष 1974 में दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ के अध्यक्ष बने। यही से उनके राजनीति जीवन की शुरुआत हुई। 


  • 1977 में शुरू की वकालत

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    परिवार के साथ अरुण जेटली

    जेपी के आंदोलन से जुड़ने के बाद वह धीरे-धीरे लोकप्रिय होने लगे और 1974 में डीयू छात्रसंघ के अध्यक्ष बनने के बाद, उनकी पहचान और बढ़ गई। उन्हें 1975-77 तक देश में आपातकाल के दौरान मीसा एक्ट के तहत 19 महीने तक नजरबंद कर दिया गया। मीसा एक्ट हटने के बाद उन्होंने 1977 में उच्चतम न्यायालय में और कई उच्च न्यायालयों में वकालत शुरू कर दी। 

  • और इस तरह जनसंघ से जुड़े

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    नेताओं के साथ जेटली

    जब मीसा एक्ट हटा उसके बाद अरुण जेटली जनसंघ में शामिल हो गए। 10 जनवरी 1980 को उन्होंने बीजेपी ज्वाइन कर ली। वह बीजेपी के प्रारंभिक सदस्यों में से एक रहे। इससे पहले वह एबीवीपी के सदस्य थे। अरुण जेटली सदैव ही भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों को उठाते रहे। अरुण जेटली ने ही बोफोर्स घोटाले में भी जांच के लिए कागजी कार्रवाई करने में अहम योगदान दिया। यही नहीं, सुप्रीम कोर्ट में जाने से पहले उन्होंने देश के कई उच्च न्यायालयों में काम किया। 

  • 1982 में संगीता से हुई शादी

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    संगीता के साथ जेटली

    अरुण जेटली ने 24 मई 1982 को संगीता जेटली के साथ शादी। संगीता जेटली सदैव ही उनके साथ खड़ी रही। 2014 में जब अमृतसर से वह चुनाव हारे थे, जब संगीता जेटली ने कहा कि हमें अमृतसर की जनता का फतवा मंजूर हैं। उनके 1983 में बेटी सोनाली हुई जो कि इस समय वकील है। वहीं 1989 में उनका बेटा रोहन हुआ जो कि अरुण जेटली की तरह ही वकील है। 

  • वकालत में कमाया नाम

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    अरुण जेटली

    अरुण जेटली ने लॉ के क्षेत्र में कई सारे लेख लिखे। इसके अलावा उन्होंने कई तरह के केस उच्चतम न्यायालय में लड़े। उन्होंने बहुराष्ट्रीय कंपनियां जैसे कोका कोला, पेप्सिको आदि की ओर वकालत की। उन्हें 1990 में अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल नियुक्त किया गया। उन्होंने जून 2009 से वकालत बंद कर दी। 


  • 1991 में राष्ट्रीय कार्यकारिणी में हुए शामिल

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    अटल बिहारी के साथ जेटली

    अरुण जेटली को अटल बिहारी बाजपेई ने 1991 में कैबिनेट में शामिल किया। उन्हें पहली बार भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में सदस्य के तौर पर शामिल किया गया। वह हमेशा ही पार्टी के पक्ष में बात उठाते रहें और लंबे वक्त तक भाजपा के प्रवक्ता रहे। 

  • पहली बार बने कैबिनेट मंत्री

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    कलाम के साथ शपथ लेते अरुण जेटली

    जब 1999 में एनडीए की सरकार बनी तो उन्हें तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने केंद्रीय कैबिनेट में तौर पर अपने मंत्रीमंडल में शामिल किया। उन्हें कैबिनेट में सूचना एवं प्रसारण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) के रूप में जिम्मेदारी सौंपी। इसके अलावा निर्गुण राज्य (स्वतंत्र प्रभार), विश्व व्यापार संगठन मंत्रालय की जिम्मेदारी भी जेटली को सौंपी गई। यही नहीं राम जेठमलानी के इस्तीफा देने के बाद 23 जुलाई 2000 को वह कानून, न्याय और कंपनी मामलों के मंत्रालय की अतिरिक्त जिम्मेदारी दी गई। 

  • क्रिकेट से भी रहा नाता

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    क्रिकेट टीम के साथ जेटली

    अरुण जेटली का क्रिकेट संघ से भी नाता रहा है। बीसीसीआई के वाइस प्रेसीडेंट ने उन्हें दिल्ली डिस्ट्रिक क्रिकेट एसोसिएशन का अध्यक्ष नियुक्त किया। राजनीतिक के साथ ही साथ क्रिकेट की पिच पर भी उन्होंने जमकर बैटिंग की। यही नहीं 2009 में वह बीसीसीआई के वाइस प्रेसीडेंट बने। 

  • राज्यसभा से शुरू हुआ संसद का सफर

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    अटल जी के साथ जेटली

    अरुण जेटली 2002 में पार्टी के महासचिव बनाए गए। यही नहीं पहली बार वह 2006 में राज्यसभा सांसद बनाए गए। जून 2009 से वे राज्यसभा में विपक्ष के नेता भी रहे। पार्टी में जेटली ने एक महत्वपूर्ण रणनीतिकार से लेकर कई बड़ी जिम्मेदारियां संभाली। 


  • नरेंद्र मोदी से रही पुरानी दोस्ती

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    मोदी जी के साथ अरुण जेटली

    नरेंद्र मोदी को दिल्ली तक लाने में अहम रोल निभाने वाले अरुण जेटली के जीवन में कई मोड़ आए। गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी से उनकी काफी पहले हुई दोस्ती, जिसकी वजह से उन्हें भाजपा में ऊपर पहुंचने में मदद मिली। जब 2002 के दंगों के बाद गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी पर सवाल उठे, तो उन्होंने उनके पक्ष में खुलकर राजनैतिक और कानूनी रूप से बचाव किया। उस दौरान अरुण जेटली उदारवादियों की लानत-मलानत के केंद्र बिंदु बन गए। वे हमेशा ही मोदी के साथ रहे और इसका फायदा दोनों को मिला।

  • चुनावी राजनीति बनाने में महारत

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    अरुण जेटली के साथ बीजेपी नेता

    भाजपा के लिए अहम रोल निभाने वाले अरुण जेटली पिछले कुछ दशक चुनावी मैनेजमेंट संभाल रहे थे। जेटली की ही देख-रेख में चुनावी राजनीति में कई अहम प्रयोग हुए। उन्होंने कर्नाटक में 2008 में भाजपा को जिताने में मदद की, जिससे दक्षिण के भाजपा विरोधी किले को ढहाने में मदद मिली। यही नहीं मोदी को गुजरात में तीन बार चुनावी जीत में मदद की। इसके अलावा उन्होंने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को भी 2005 में गठबंधन के लिए मनाया था, जो आपातकाल के दिनों के उनके पुरानी साथी थे। उस समय ये लोग जयप्रकाश नारायण के अनुयायी थे। यही नहीं 2015 में बीजेपी की हार के बाद भी वह दोबारा एनडीए में लाने में अहम रहे। 

  • मोदी कैबिनेट के अहम स्तंभ रहे

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    अरुण जेटली और सुषमा जी

    2014 लोकसभा चुनावों में उनको अमृतसर लोकसभा सीट से चुनावी मैदान में उतारा गया। हालांकि, जेटली यह चुनाव हार गए, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उन्हें अपने कैबिनेट में शामिल करना चाहते थे। मोदी कैबिनेट में मिले 2 बड़े मंत्रालय जेटली की मेहनत और लगन को देखते पीएम मोदी ने उन्हें केंद्रीय वित्त और रक्षा मंत्रालय की दो बड़ी जिम्मेदारियां दी। उन्होंने नोटबंदी और जीएसटी में निभाई अहम भूमिका निभाई। अरुण जेटली मई 2014 में राज्यसभा में सदन के नेता बने। कुछ समय बाद प्रधानमंत्री मोदी ने गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर को रक्षा मंत्री बना दिया और उसके बाद अरुण जेटली ने देश के वित्त मंत्री का पद संभाला था। 

  • बजट में उनका शायराना अंदाज

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    बजट पेश करने जाने से पहले

    अरुण जेटली को शेरो शायरी का बेहद शौक है। बजट पेश करते हुए उनका अपना अलग ही अंदाज था। यही नहीं उन्होंने कई बार शायरियों के बल पर ही विपक्ष पर काफी अच्छे से तंज कसा है। वह हमेशा ही चर्चा में भी रहे। 


    साल 2017 के बजट में जेटली ने पढ़ी ये शेर


    इस मोड़ पर घबरा कर न थम जाइए आप,


    जो बात नई है अपनाइए आप,


    डरते हैं क्यों नई राह पर चलने से आप,


    हम आगे आगे चलते हैं आइए आप।


    साल 2016 में बजट पेश करते समय जेटली ने पढ़ी थी ये शायरी.


    कश्ती चलाने वालों ने जब हार कर दी पतवार हमें,


    लहर लहर तूफान मिलें और मौज-मौज मझधार हमें,


    फिर भी दिखाया है हमने और फिर ये दिखा देंगे सबको,


    इन हालातों में आता है दरिया करना पार हमें


    2015 के बजट पेश के दौरान जेटली की शायरी


    कुछ तो फूल खिलाये हमने


    और कुछ फूल खिलाने हैं,


    मुश्किल ये है बाग में


    अब तक कांटें कई पुराने हैं।

  • कर्मचारियों का रखते थे ख्याल

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    बेटे के साथ अरुण जेटली

    अरुण जेटली आज भले ही नहीं रहे, लेकिन उनकी याद हमेशा ही लोगों के दिलों में जिंदा रहेगी। उन्होंने अपने कर्मचारियों के लिए जो कुछ किया, उसे वह लोग कभी नहीं भूला सकते हैं। अरुण जेटली गुप्तदान के तरीके से अपने यहां के कर्मचारियों के बच्चों को ऊंचा उठाने के लिए कई तरह की जिम्मेदारियां निभाते थे। उनके निजी स्टाफ के परिवार की देखरेख अपने परिवार की तरह की करते थे। निजी स्टाफ के बच्चे भी वहीं पढ़ते थे, जहां पर उनके बच्चे पढ़े हैं। उनके स्टाफ के बच्चे चाणक्यपुरी स्थित उसी कार्मल कॉन्वेंट स्कूल में पढ़ते हैं, जहां जेटली के बच्चे पढ़े हैं। यही नहीं उनके कर्मचारियों के बच्चे विदेश में पढ़े है। पिछले तीन दशकों से उनके साथ जुड़े करीब 10 कर्मचारियों के तीन बच्चे अभी विदेश में पढ़ रहे हैं। 

  • सहयोगी का एक बेटा डॉक्टर, दूसरा बेटा इंजीनियर

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    अरुण जेटली

    अरुण जेटली के परिवार की खान-पान की व्यवस्था देखने वाले जोगेंद्र की दो बेटियों में एक बेटी लंदन में पढ़ रही हैं। यही नहीं उनके साथ संसद में साए के तरह से रहने वाले सहयोगी गोपाल भंडारी का एक बेटा डॉक्टर और दूसरा इंजीनियर बन चुका है। यही नहीं उनके स्टाफ के अहम चहरे रहे सुरेंद्र के बेटे भी अच्छी पढ़ाई कर चुके हैं। यही नहीं जिन कर्मचारियों के बच्चे एमबीए या कोई अन्य प्रोफेशनल कोर्स करना चाहते थे, उसमें जेटली फीस से लेकर नौकरी दिलाने तक का प्रबंध करते थे। उन्होंने 2005 में सहायक रहे ओपी शर्मा के बेटे चेतन को लॉ की पढ़ाई के लिए अपनी 6666 नंबर की एसेंट कार गिफ्ट में दी थी। यही नहीं वह जिस तरह से अपने बच्चे (रोहन व सोनाली) को जेब खर्च चेक से देते थे। उसी तरह से अपने स्टाफ को वेतन और मदद सबकुछ चेक से करते थे। 

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