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सुप्रीम कोर्ट सुना रहा है अयोध्या पर फैसला, पढ़ें अभी तक की पूरी कहानी
आइए जानते हैं कि बाबरी मस्जिद के बनने से लेकर अभी तक इस अयोध्या विवाद में क्या-क्या हुआ…
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अयोध्या मामले को लेकर लम्बे समय से सुप्रीम कोर्ट में चली आ रही सुनवाई 16 अक्टूबर को पूरी हो गई थी। आज सुप्रीम कोर्ट इस मामले पर अपना फैसला सुना रहा है। सीजेआई रंजन गोगोई 17 नवम्बर को रिटायर हो रहे हैं इसलिए ये फैसला उनके रिटायरमेंट से पहले ही होना था। अयोध्या का राम मंदिर और बाबरी मस्जिद विवाद लगभग 70 साल से भी पुराना है, लेकिन इस मामले पर कोई फैसला आज तक नहीं आ सका। आइए जानते हैं कि बाबरी मस्जिद के बनने से लेकर अभी तक इस अयोध्या विवाद में क्या-क्या हुआ…

  • बाबरी मस्जिद का बनना

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    1528 में बनी थी बाबरी मस्जिद

    1528 में भारत के प्रथम मुगल सम्राट बाबर के आदेश पर अयोध्या में बाबरी मस्जिद का निर्माण कराया गया। इस मस्जिद का नाम मीर बाकी मीर ने बाबरी मस्जिद रखा था।

  • रामजी की मूर्ति

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    23 दिसंबर, 1949 को लगभग 50 हिंदुओं ने बाबरी मस्जिद के मुख्य स्थान पर कथित तौर पर भगवान राम की मूर्ति रख दी और वहां रोज पूजा करना शुरू कर दिया। इसके बाद मुसलमानों ने बाबरी मस्जिद में नमाज पढ़ना बंद कर दिया। 

    16 जनवरी 1950 को गोपाल सिंह विशारद नाम के शख्स ने फैजाबाद कोर्ट में एक अपील दायर करके बाबरी मस्जिद में रखी गई रामलला की मूर्ति की पूजा की विशेष इजाजत मांगी। इसके साथ ही उन्होंने मांग की कि इस जगह से मूर्ति हटाने पर न्यायिक रोक लगा दी जाए।

    5 दिसंबर, 1950 को बाबरी मस्जिद में हिंदू प्रार्थनाएं जारी रखने और राममूर्ति रखने के लिए  महंत परमहंस रामचंद्र दास ने मुकदमा दायर किया। इसके साथ ही मस्जिद को 'ढांचा' नाम दिया गया।

    17 दिसंबर, 1959 को निर्मोही अखाड़ा ने विवादित स्थल हस्तांतरित करने के लिए मुकदमा दायर किया।

    18 दिसंबर, 1961 को उत्तर प्रदेश सुन्नी वक्फ बोर्ड ने बाबरी मस्जिद के मालिकाना हक के लिए मुकदमा दायर किया।

    1984 में विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) ने बाबरी मस्जिद के ताले खोलने और राम जन्मस्थान को स्वतंत्र कराने व एक विशाल मंदिर के निर्माण के लिए अभियान शुरू किया। एक समिति का गठन किया गया।

    1 फरवरी, 1986 को फैजाबाद जिला न्यायाधीश ने विवादित स्थल पर हिदुओं को पूजा की इजाजत दी। ताले दोबारा खोले गए। नाराज मुस्लिमों ने विरोध में बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी का गठन किया।

    जून 1989 में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने वीएचपी को औपचारिक समर्थन देना शुरू करके मंदिर आंदोलन को नया जीवन दे दिया। 

  • बाबरी मस्जिद विध्वंस

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    6 दिसंबर, 1992 को अयोध्या पहुंचकर हजारों की संख्या में कार सेवकों ने बाबरी मस्जिद को गिरा दिया। उस वक्त अयोध्या में बस कुछ नारे गूंज रहे थे, मसलन एक धक्का और दो, बाबरी मस्जिद तोड़ दो। बच्चा-बच्चा राम का, जन्मभूमि के काम का।  बाबरी विध्वंस के बाद देशभर में दंगे हुए। प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव ने मस्जिद के पुनर्निर्माण का वादा किया। 

    16 दिसंबर, 1992 को बाबरी मस्जिद विध्वंस की जांच के लिए एमएस लिब्रहान आयोग का गठन किया गया। 

    1994 में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ में बाबरी मस्जिद विध्वंस से संबंधित केस की सुनवाई शुरू हुई।

    4 मई, 2001 को स्पेशल जज एसके शुक्ला द्वारा भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी सहित 13 नेता आरोप मुक्त किए गए। 

    1 अप्रैल 2002 को अयोध्या के विवादित स्थल पर मालिकाना हक को लेकर इलाहबाद हाईकोर्ट के तीन जजों की पीठ ने सुनवाई शुरू की। मंदिर या मस्जिद के प्रमाण के लिए 5 मार्च 2003 को इलाहबाद हाईकोर्ट ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण को अयोध्या में खुदाई का निर्देश दिया।

    22 अगस्त, 2003 को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने अयोध्या में खुदाई के बाद इलाहबाद हाईकोर्ट को अपनी रिपोर्ट सौंपी। इस रिपोर्ट में कहा गया कि मस्जिद के नीचे 10वीं सदी के मंदिर के अवशेष प्रमाण मिले हैं। हालांकि, इस रिपोर्ट को ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने चुनौती दी।

    सितंबर 2003 में अदालत ने फैसला देते हुए कहा कि मस्जिद के विध्वंस को उकसाने वाले सात हिंदू नेताओं को सुनवाई के लिए बुलाया जाए।


  • सुप्रीम कोर्ट

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    जुलाई 2009 में लिब्रहान आयोग ने गठन के 17 साल बाद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को अपनी रिपोर्ट सौंपी। 

    26 जुलाई, 2010 को इस मामले की सुनवाई कर रही इलाहबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने फैसला सुरक्षित रखा और सभी पक्षों को आपस में इसका हल निकाले की सलाह दी।

    28 सितंबर 2010 को सुप्रीम कोर्ट ने इलाहबाद हाईकोर्ट को विवादित मामले में फैसला देने से रोकने वाली याचिका खारिज करते हुए फैसले का रास्ता साफ किया।

    30 सितंबर 2010 को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए विवादित जमीन का तीन हिस्सों में बंटवारा कर दिया। इसमें एक हिस्सा राम मंदिर, दूसरा सुन्नी वक्फ बोर्ड और निर्मोही अखाड़े को मिला।

    9 मई 2011 को सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी।

    21 मार्च 2017 को सुप्रीम कोर्ट ने आपसी सहमति से विवाद सुलझाने को कहा। 

    19 अप्रैल 2017 को सुप्रीम कोर्ट ने बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती सहित भाजपा और आरएसएस के कई नेताओं के खिलाफ आपराधिक केस चलाने का आदेश दिया। 

    16 नवंबर 2017 को आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर ने मामले को सुलझाने के लिए मध्यस्थता की और कई पक्षों से मुलाकात की।

    5 दिसंबर 2017 को सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान 8 फरवरी तक सभी दस्तावेजों को पूरा करने के लिए कहा। 


  • राम मंदिर के समर्थन में रैली

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    8 फरवरी 2018 को सुन्नी वक्फ बोर्ड की तरफ से पक्ष रखते हुए वरिष्ठ वकील राजीव धवन ने सुप्रीम कोर्ट से मामले पर नियमित सुनवाई करने की अपील की। हालांकि, उनकी याचिका खारिज हो गई। 

    14 मार्च 2018 को वकील राजीव धवन ने कोर्ट से साल 1994 के इस्माइल फारूकी बनाम भारतीय संघ के फैसले को पुर्नविचार के लिए बड़ी बेंच के पास भेजने की मांग की। 

    20 जुलाई 2018 को सुप्रीम कोर्ट ने राजीव धवन की अपील पर फैसला सुरक्षित रखा। 

    27 सितंबर 2018 को कोर्ट ने इस्माइल फारूकी बनाम भारतीय संघ के 1994 का फैसले को बड़ी बेंच के पास भेजने से इनकार कर दिया और कहा कि अयोध्या में राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद में दीवानी वाद का निर्णय साक्ष्यों के आधार पर होगा और पूर्व का फैसला सिर्फ भूमि आधिग्रहण के केस में ही लागू होगा।

    1 दिसंबर 2018 को आरएसएस, विश्व हिंदू परिषद और कुछ दूसरी दक्षिण पंथी विचार धान की संगठनों ने एक रैली निकाली, जिसमें उन्होंने नारा दिया - विकास नहीं, मंदिर चाहिए। 


  • मध्यस्थता कमेटी

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    1 जनवरी 2019 को केंद्र सरकार ने अपनी याचिका में विवादित राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद स्थान के आसपास 67.390 एकड़ गैर-विवादित अधिग्रहित जमीन मूल मालिकों को लौटाने की अपील की।

    8 मार्च 2019 को सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या के राम मंदिर और बाबरी मस्जिद मामले को मध्यस्थता के लिए भेज दिया। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता में पांच जजों वाली पीठ ने तीन सदस्यों को मध्यस्थता समिति का सदस्य बनाया गया। सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस फकीर मोहम्मद इब्राहिम खलीफुल्ला इस समिति के प्रमुख थे। उनके अलावा पैनल में आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर और वरिष्ठ अधिवक्ता श्रीराम पंचू भी शामिल किया गया। हिंदू महासभा के वकील वरुण कुमार सिन्हा ने इस फैसले का विरोध करते हुए कहा कि मध्यस्था के हमारे पुराने अनुभव बुरे ही रहे हैं, इसलिए सुप्रीम कोर्ट को इसपर विचार करना चाहिए। 

    15 जून 2019 को उत्तर प्रदेश उप मुख्य मंत्री केशव मौर्या ने कहा कि अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण जल्द ही करवाया जाएगा, इसके लिए तीन विकल्पों पर मंथन चल रहा है। पहला- कोर्ट की मध्यस्थता कमिटी के जरिए आपसी सहमति बनाकर। दूसरा- कोर्ट के फैसले के आधार पर और अगर ये दोनों विकल्प सार्थक नहीं निकले तो संसद में कानून बनाकर। केशव मौर्य ने कहा कि राम मंदिर के निर्माण में कोई संशय नहीं है, यह अवश्य बनेगा। 


  • चीफ जस्टिस रंजन गोगोई

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    11 जुलाई 2019 को सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद मामले को लेकर सुनवाई हुई। इस मसले पर याचिकाकर्ताओं की ओर से कहा गया था कि अदालत ने मध्यस्थता का जो रास्ता निकाला था, वह काम नहीं कर रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने जिस पर मध्यस्थता पैनल से रिपोर्ट की मांग की।

    18 जुलाई को प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने तीन सदस्यीय मध्यस्थता समिति को कहा कि मध्यस्थता कार्यवाही के परिणामों के बारे में 31 जुलाई या एक अगस्त तक अदालत को सूचित करें ताकि वह मामले में आगे बढ़ सके।

    1 अगस्त 2019 को अयोध्या राम जन्मभूमि मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित मध्यस्थता कमेटी ने अपनी सीलबंद रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में दायर की

    2 अगस्त 2019 को अयोध्या में रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद मामले में मध्यस्थता से कोई नतीजा नहीं निकल सका। कुछ पक्षों ने मध्यस्थता पर सहमति नहीं जताई। 6 अगस्त से अयोध्या मामले की रोजाना सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में होगी। पांच जजों के संविधान पीठ का यह फैसला लिया।

  • 6 अगस्त से शुरू हुई रोजाना सुनवाई

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    पहला दिन

    6 अगरस्त से सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या विवाद की रोजाना सुनवाई शुरू हुई। इस दिन सुनवाई में निर्मोही अखाड़ा ने 2.77 एकड़ विवादित जमीन पर अपना दावा किया था। उन्होंने कहा कि पूरी विवादित भूमि पर 1934 से ही मुसलमानों को प्रवेश की मनाही है।


    दूसरा दिन

    7 अगस्त यानि दूसरे दिन की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने निर्मोही अखाड़े से सवाल किया कि राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद के विवादित स्थल पर अपना कब्जा साबित करने के लिए क्या उनके पास मौखिक या दस्तावेजी साक्ष्य हैं या कुर्की से पहले रामजन्मभूमि के कब्जे का राजस्व रिकॉर्ड? इस पर पांच सदस्यी बेंच के समक्ष अखाड़ा ने कहा कि साल 1982 में डकैती हुई थी, जिसमें हमने सारे रिकॉर्ड खो दिए।


    तीसरा दिन

    तीसरे दिन की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने पूछा था कि एक देवता के जन्मस्थल को न्याय पाने का इच्छुक कैसे माना जाए, जो इस केस में पक्षकार भी हो। इस पर वकील ने कहा था कि हिंदू धर्म में किसी स्थान को पवित्र मानने और पूजा करने के लिए मूर्तियों की जरूरत नहीं है।


    चौथा दिन 

    चौथे दिन की सुनवाई में ये कहा गया कि विवादित स्थल पर ढांचे को तोड़कर निर्माण किया गया। मस्जिद पहले से वहां नहीं थी। मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता में पांच जजों की पीठ में जस्टिस एसए बोब्डे ने कहा, इसमें कोई विवाद नहीं है कि जन्मस्थान पर विध्वंस और निर्माण हुआ। यहां पर मस्जिद बनी। पीठ ने यह टिप्पणी तब कि जब रामलला विराजमान के वकील सीएस वैद्यनाथन ने बताया कि 1945 में शिया वक्फ बोर्ड ने सुन्नी बोर्ड के खिलाफ जिला अदालत में मुकदमा दर्ज किया था। 


    पांचवा दिन

    इस दिन की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट में इस बात पर बहस शुरू हुई कि क्या इस विवादित स्थल पर पहले कोई मंदिर था। पांच सदस्यीय संविधान पीठ के सामने रामलला विराजमान की तरफ से सीनियर एडवोकेट सी एस वैद्यनाथन ने मस्जिद के निर्माण होने से पहले इस विवादित स्थल पर कोई मंदिर होने संबंधी सवाल पर बहस शुरू की। इस बहस के दौरान उन्होंने कहा कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने तीन न्यायाधीशों की पीठ अपने फैसले में कहा है कि विवादित स्थल पर मंदिर था।


  • सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई जारी है

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    छठा दिन

    रामलला विराजमान की ओर से वकील ने छठे दिन कहा कि अयोध्या भगवान राम का जन्म स्थान है इस बात पर हिंदुओं को विश्वास है। साथ ही उन्होंने कहा कि न्यायालय को इसके तर्कसंगत होने की जांच के लिये इसके आगे नहीं जाना चाहिए। वकील सीएस वैद्यनाथ ने आगे की दलीलें पेश करते हुए पीठ से कहा, 'हिंदुओं का विश्वास है कि अयोध्या भगवान राम का जन्म स्थान है और न्यायालय को इसके आगे जाकर यह नहीं देखना चाहिए कि यह कितना तार्किक है। उन्होंने कहा कि भगवान राम की जन्मस्थली अपने आप में देवता है और मुस्लिम 2.77 एकड़ विवादित जमीन पर अधिकार होने का दावा नहीं कर सकते क्योंकि संपत्ति को बांटना ईश्वर को 'नष्ट करने और उसका 'भंजन करने के समान होगा।'


    सातवां दिन

    इस दिन रामलला विराजमान की ओर से दलील दी गई कि विवादित स्थल पर देवताओं की अनेक आकृतियां मिली हैं।  इस दिन अधिवक्ता सी एस वैद्यनाथन ने अपनी दलीलों के समर्थन में विवादित स्थल का निरीक्षण करने के लिये अदालत द्वारा नियुक्त कमिश्नर की रिपोर्ट के अंश पढ़े। 


    आठवां दिन

    वरिष्ठ अधिवक्ता सीएस वैद्यनाथन ने अदालत में कहा कि 'एएसआई की रिपोर्ट में मगरमच्छ और कछुए की आकृतियों का जिक्र है, जिसका मुस्लिम संस्कृति से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने एएसआई की रिपोर्ट का जिक्र करते हुए कहा कि अयोध्या में मस्जिद का निर्माण करने के लिए हिंदू मंदिर गिराया गया। 


    नवां दिन

    सुनवाई के नौवें दिन रामजन्म पुनरोद्धार समिति के वकील पीएन मिश्रा ने कहा कि अथर्व वेद में अयोध्या की पवित्रता का जिक्र किया गया है। इसमें कहा गया है कि अयोध्या में एक मंदिर है, जिसमें पूजा करने से मुक्ति मिलती है। इस पर मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने कहा कि अयोध्या की पवित्रता पर कोई संदेह नहीं। आप विवादित स्थल के ही जन्मस्थान होने के साक्ष्य पेश करें।


    10वां दिन

    सुनवाई के दसवें दिन निर्मोही अखाड़ा ने अनंतकाल से विवादित स्थल पर भगवान 'राम लला विराजमान का एकमात्र आधिकारिक शबैत  (राम लला का भक्त) होने का दावा करते हुए कहा था कि वह वहां पर पूजा के लिये पुरोहित नियुक्त करता रहा है। प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने कहा, जिस क्षण आप कहते हैं कि आप शबैत हैं, आपका (अखाड़ा) संपत्ति पर मालिकाना हक नहीं रह जाता है।

  • निर्मोही अखाड़े ने पेश कीं दलीलें

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    11वां दिन

    सुप्रीम कोर्ट निर्मोही अखाड़े की ओर से दलील रख रहे सुशील जैन को हिदायत दी कि अब वो लिमिटेशन के बजाए केस की मेरिट पर बात करें। सुशील जैन ने कोर्ट से कहा था कि वो विवादित जमीन पर मालिकाना हक का दावा नहीं कर रहे, सिर्फ पूजा प्रबंधन और कब्जे का अधिकार मांग रहे हैं।


    12वां दिन

    मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच जजों की संविधान पीठ के समक्ष निर्मोही अखाड़े ने अपना पक्ष रखा और वह इसी बात पर अड़ा रहा कि पूरा विवादित हिस्सा उनका है। रामलला और उनके मित्र का इसमें कोई भी हक नहीं बनता।


    13वां दिन

    सुप्रीम कोर्ट में हुई 13वें दिन की सुनवाई में निर्मोही अखाड़े के वकील सुशील जैन ने कहा कि विवादित ढांचे में मुस्लिम ने 1934 के बाद से कभी नमाज नहीं पढ़ी है। ये मंदिर ही था जिसकी देखरेख निर्मोही अखाड़ा करता था। 


    14वां दिन

    सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट में श्रीराम जन्मभूमि पुनरुत्थान समिति की ओर से वरिष्ठ वकील पीएन मिश्रा ने दलीलें देते हुए इस बात का खंडन किया कि अयोध्या में विवादित मस्जिद बाबर ने बनवाई थी।


    15वां दिन

    सुप्रीम कोर्ट ने एक हिंदू संस्था की इस मांग को थोड़ी समस्या वाली बताया कि करीब 500 साल के बाद इस बात की न्यायिक तरीके से छानबीन की जाए कि क्या मुगल शासक बाबर ने अयोध्या में विवादित ढांचे को 'अल्लाह' को समर्पित किया था ताकि यह इस्लाम के तहत वैध मस्जिद बन सके। 'अखिल भारतीय श्री राम जन्म भूमि पुनरुद्धार समिति के वकील ने प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ से कहा कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने यह कहकर गलती की कि वह इस मामले में नहीं जाएगा कि क्या बाबर ने  'शरिया' 'हदीस' और अन्य इस्लामिक परंपराओं का पालन किए बिना मस्जिद का निर्माण कराया।


  • सुप्रीम कोर्ट ने शिया वक्फ बोर्ड के वकीलों की दलीलें सुनीं

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    16वां दिन

    अयोध्या मामले में हुई सुनवाई में उच्चतम न्यायालय ने शिया बोर्ड के वकील को भी सुना। इस दौरान शिया बोर्ड ने कहा कि हमने इमाम तो सुन्नी रखा लेकिन मुतवल्ली यानि संपति के रक्षक हम ही थे। शिया बोर्ड मुख्य मुकदमे में पार्टी नहीं है। देश के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच जजों की पीठ ने बोर्ड के वकील एमसी धींगरा से सवाल किया कि जब 1946 में उनकी अपील सिविल अदालत में खारिज हो गई थी तो उन्होंने अपील क्यों नहीं की। धींगरा ने कहा कि हम डरे हुए थे। शिया बोर्ड ने 2017 में इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की है।


    17वां दिन

    एडवोकेट राजीव धवन ने पीठ को बताया कि कानूनी मामलों में ऐतिहासिक बातों और तथ्यों पर पूरी तरह भरोसा नहीं किया जा सकता। सुन्नी वक्फ बोर्ड और वास्तविक याचिकाकर्ताओं में से एक एम सिद्दीक की ओर से पेश धवन ने कहा कि 1934 में आपने (हिन्दुओं) मस्जिद को तोड़ दिया और 1949 में अवैध घुसपैठ की और 1992 में आपने मस्जिद को पूरी तरह नष्ट कर दिया और सभी तबाही के बाद आप कह रहे हैं कि ब्रिटिश लोगों ने हिन्दुओं के खिलाफ काम किया। अब आप कह रहे हैं कि हमारे अधिकार की रक्षा की जानी चाहिए।


    18वां दिन

    अयोध्या में राम जन्मभूमि विवाद की उच्चतम न्यायालय में सुनवाई के 18वें दिन मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन ने दलील कि मस्जिद में भगवान राम की मूर्ति छल से स्थापित की गई थी। मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष धवन ने कहा कि हिन्दू पक्ष की दलील है कि मुस्लिम पक्ष के पास विवादित जमीन के कब्जे का अधिकार नहीं हैं, न ही मुस्लिम पक्ष वहां नमाज अदा करते हैं। उसकी वजह यह है कि 1934 में निर्मोही अखाड़े ने अवैध कब्जा किया। हमें नमाज पढ़ने नहीं दी गई। 


    19वां दिन

    19वें दिन मुस्लिम पक्षकारों ने दलील दी कि लगातार नमाज ना पढ़ने और मूर्तियां रख देने से मस्जिद के अस्तित्व पर सवाल नहीं उठाए जा सकते। मुस्लिम पक्ष ने कहा कि यह सही है कि विवादित ढांचे का बाहरी अहाता शुरू से निर्मोही अखाड़े के कब्जे में रहा है। झगड़ा आंतरिक हिस्से को लेकर है जिस पर कब्जा किया गया, लेकिन अदालत में किए गए उनके दावों में यह नहीं है। हम प्रतिकूल कब्जा मांग रहे हैं।


    20वां दिन

     मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन ने कहा कि निर्मोही अखाड़ा 1734 से अस्तित्व का दावा कर रहा है, लेकिन अखाड़ा 1885 में बाहरी आंगन में था और राम चबूतरा बाहरी आंगन में है जिसे राम जन्मस्थल के रूप में जाना जाता है और मस्जिद को विवादित स्थल माना जाता है। मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई के समक्ष धवन ने निर्मोही अखाड़े के गवाहों के दर्ज बयानों पर जिरह करते हुए महंत भास्कर दास के बयान का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि उन्होंने माना कि मूर्तियों को दिसंबर 1949 में विवादित ढांचे के बीच वाले गुंबद के नीचे रखा गया था।  

  • दोनों पक्षों की दलीलें सुप्रीम कोर्ट में जारी

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    21वां दिन

    मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्याक्षता वाली पांच जजों के समक्ष मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन ने कहा कि इस मामले में दिसंबर 1950 का मजिस्ट्रेट का आदेश गलत था। इस आदेश के बाद ही से हिन्दू पक्ष अपना दावा जता रहा है। धवन ने कहा कि ये स्थल उनसे जुड़ा हुआ नहीं है, वे उसके मालिक नहीं है। ये स्थल हमसे जुड़ा है और इस पर हमारा अधिकार है।  


    22वां दिन

    22वें दिन की सुनवाई में मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच जजों की पीठ के समक्ष धवन ने कहा कि हिंदू पक्ष जबरन घुसकर कब्जा करने के बाद स्थल पर मालिकाना हक मांग रहा है। क्या गैरकानूनी कार्य करने के बाद प्रतिकूल कब्जे का फायदा लिया जा सकता है?' उन्होंने कहा कि लिमिटेशन एक्ट (मुकदमा दायर करने की समयसीमा संबंधी कानून) की धारा 65 और 142 के तहत प्रतिकूल कब्जा तभी होगा, जब इसमें कब्जे का एनिमस (इरादा) और कॉर्पस (वस्तु) हो तथा ये दोनों संयुक्त रूप से मौजूद हों। इसमें संवेदना और तंगियों को कोई तवज्जो नहीं दी जाती। 


    23वां दिन

    मुस्लिम पक्ष की तरफ से वरिष्ठ वकील जाफरयाब जिलानी ने कहा कि साल 1885 में निर्मोही अखाड़े ने जब अदालत में याचिका दाखिल की थी तब उन्होंने अपनी याचिका में विवादित जमीन के पश्चिमी सीमा पर मस्जिद होने की बात की थी। 


    24वां दिन

    अयोध्या मामले की सुनवाई के 24वें दिन मुस्लिम पक्षकारों के वकील ने कहा है कि जन्मस्थान कानूनी व्यक्ति नहीं है। वहीं, हिंदू पक्षकार की ओर से आस्था व विश्वास के साथ-साथ जन्मस्थान और जन्मभूमि को लेकर दलील दी गई।


    25वां दिन

    25वें दिन की सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन ने अपनी दलील में कहा कि किसी स्थान को न्यायिक व्यक्ति में बदलने के लिए पवित्रता ही पर्याप्त नहीं है। इसके लिए उसमें कैलाश पर्वत जैसी भौतिक अभिव्यक्ति और आस्था की निरंतरता के साथ यह भी दिखाया जाना चाहिए कि निश्चित रूप से वहीं प्रार्थना की जाती थी।


    26वां दिन

    सुप्रीम कोर्ट ने मामले से जुड़े पक्षकारों से 18 अक्टूबर तक अपनी जिरह पूरी करने को कहा है। इसके बाद सुन्नी वक्फ बोर्ड ने बहस के लिए अगले हफ्ते तक का समय मांगा, जबकि निर्मोही अखाड़े को अपनी दलील रखने के लिए कितना समय चाहिए, इस बारे में उन्होंने कोर्ट को जानकारी नहीं दी। रामलाल पक्ष ने कहा कि वह इस बारे में दो दिन में अपना जवाब कोर्ट को दे देंगे।


    27वां दिन 

    सुप्रीम कोर्ट ने राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद जमीन विवाद में मुस्लिम पक्षकारों की पैरवी करने पर वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव धवन को आपत्तिजनक पत्र लिखने वाले 88 वर्षीय सेवानिवृत्त लोकसेवक के खिलाफ बृहस्पतिवार को अवमानना का मामला बंद कर दिया। प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने कहा कि इस वयोवृद्ध व्यक्ति ने धवन को लिखे पत्र में आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल करने पर खेद व्यक्त कर दिया है। पीठ ने उसे आगाह किया कि भविष्य में इस तरह की हरकत की पुनरावृत्ति नहीं होनी चाहिए।


    28वां दिन

    सुनवाई के 28वें दिन कोर्ट में सुन्नी वक्फ बोर्ड के अधिवक्ता ने नरमी बरती। उन्होंने कहा कि कोई शक नहीं है कि भगवान राम का सम्मान होना चाहिए।


    29वां दिन

    मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन ने 29वें दिन की सुनवाई में कहा कि हिंदू पक्ष चाहता है कि राम जन्मभूमि पर मौजूद निर्माण को ध्वस्त कर दिया जाए। इसके बाद वहां पर मंदिर का निर्माण कर दिया जाए।


    30वां दिन 

    सुप्रीम कोर्ट में 30वें दिन की सुनवाई में मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन ने दलीलें पेश कीं। उन्होंने कहा कि केवल विश्वास के आधार पर यह स्पष्ट नहीं होता कि अयोध्या में मंदिर था। 

  • वकील ने एएसआई की रिपोर्ट को बताया महज विचार

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    31वां दिन

    अयोध्या में खुदाई के बाद हिंदू मंदिरों के प्रमाण होने संबंधी पुरातत्व विभाग (एएसआई) की रिपोर्ट पर सवाल उठाने पर उच्चतम न्यायालय ने सुन्नी बोर्ड को फटकारा और कहा वह इस रिपोर्ट पर सवाल नहीं उठा सकते। उन्हें ट्रायल कोर्ट में सवाल उठाने चाहिए थे तब उठाए नहीं, अब उन्हें अपीलीय अदालत में ऐसा नहीं करने दिया जा सकता। पांच जजों की पीठ ने कहा कि सुन्नी सेंट्रल बोर्ड की वकील मीनाक्षी अरोड़ा से कहा कि एएसआई की रिपोर्ट और उसके निष्कर्षों पर सवाल उठाने का हक नहीं है। शीर्ष अदालत ने कहा कि हाईकोर्ट में वह दीवानी प्रक्रिया संहिता के आदेश 26, रूल 10(2) के तहत इस रिपोर्ट पर सवाल उठा सकते थे।


    32वां दिन

    राम जन्मभूमि विवाद मामले में 32वें दिन मुस्लिम पक्ष कि ओर से भारतीय पुरातत्व विभाग (एएसआई) की रिपोर्ट पर उठाए गए सवालों पर उच्चतम न्यायालय ने कहा कि अदालत विशेषज्ञों के निष्कर्ष पर कोई राय नहीं रख सकती। मुस्लिम पक्ष की वकील मीनाक्षी अरोड़ा ने मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई, एसए बोब्डे, डीवाई चंद्रचूड़, अशोक भूषण और एसए नजीर की पीठ के समक्ष दलील दी कि विवादित ढांचे के नीचे एक ईदगाह हो सकती है।


    33वां दिन

    33वां दिन मुस्लिम पक्ष की ओर से दलील रखीं गईं। वकील ने एएसआई की रिपोर्ट का जिक्र करते हुए उसे महज एक विचार बताते हुए कहा कि इसके आधार पर किसी नतीजे पर नहीं पहुंचा जा सकता।


    34वां दिन

    अयोध्या मामले में 34वें दिन सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई में मुस्लिम पक्षकार के वकील ने दलील दी कि 1885 के मुकदमे और अभी के मुकदमे एक जैसे ही हैं।


    35वां दिन

    अयोध्या मामले में सुनवाई के 35वें दिन सुप्रीम कोर्ट यानि उच्चतम न्यायालय में मंगलवार को रामजन्मभूमि विवाद पर सुनवाई के दौरान रामलला विराजमान की ओर से सीएस वैद्यनाथन ने प्रत्युत्तर में दलीलें शुरू कीं। उन्होंने पुरातात्विक खोज में मिली दीवार (नंबर 18) के मंदिर नहीं, ईदगाह की होने की मुस्लिम पक्ष की दलील खारिज कर दी।

  • 16 अक्टूबर को आखिरी सुनवाई

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    36वां दिन

    मुख्य न्यायाधीश के नेतृत्व वाली पांच जजों की पीठ ने रामजन्मस्थान पुनरोद्धार समिति को नया तथ्य रखने से रोक दिया। पीठ ने कहा कि भरोसा रखिए, हम ऐसा फैसला देंगे जिसे हमें देने की जरूरत है।


    37वां दिन

    मुस्लिम पक्ष ने कहा कि यदि मस्जिद के लिए बाबर द्वारा इमदाद देने के सबूत नहीं हैं, तो सबूत राम मंदिर के दावेदारों के पास भी नहीं है, सिवाय कहानियों के। मुस्लिम पक्ष की ओर से पेश वकील राजीव धवन ने मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति एस ए बोबडे, न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर की संविधान पीठ के समक्ष दलील दी, 'उस दौर में इसका कोई सबूत हमारे पास नहीं है, लेकिन सबूत मंदिर के दावेदारों के पास भी नहीं है, सिवाय कहानियों के।'


    38वां

    अयोध्या मामले की सुनवाई के 38वें दिन मुस्लिम पक्षकारों ने आरोप लगाया कि इस मामले में हिन्दू पक्ष से नहीं बल्कि सिर्फ हमसे ही सवाल किए जा रहे है।


    39वां दिन

    अयोध्या मामले की सुनवाई के 39वें दिन चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने स्पष्ट तौर पर कहा कि 16 अक्टूबर को इस मामले की सुनवाई का आखिरी दिन होगा। 


    40वां दिन 

    उच्चतम न्यायालय ने 16 अक्टूबर को स्पष्ट किया कि वह अयोध्या में राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद संबंधी राजनीतिक रूप से संवेदनशील मामले में प्रतिदिन हो रही सुनवाई को बुधवार शाम को पूरी कर देगा। साथ ही न्यायालय ने कहा, ''अब बहुत हो चुका।'' सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को एक हिन्दू पक्षकार की ओर से दलील दी गई कि सुन्नी वक्फ बोर्ड और अन्य मुस्लिम पक्षकार यह सिद्ध करने में विफल रहे हैं कि अयोध्या में राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवादित स्थल पर मुगल बादशाह बाबर ने मस्जिद का निर्माण किया था। इस मुद्दे पर हिन्दू पक्षकार की ओर से वकील सी एस वैद्यनाथन ने कहा, मुस्लिम पक्ष का यह दावा था कि विवाद की विषय वस्तु मस्जिद का निर्माण शासन की जमीन पर हुकूमत (बाबर) द्वारा किया गया था लेकिन वह पक्ष इसे अभी तक सिद्ध नहीं कर पाए। इस मामले पर निर्मोही अखाड़े ने अपने तर्क को देते हुए कहा कि 1885 से हम यहां पर कब्जे में हैं इसमें कोई शक नहीं है। राजस्व रिकॉर्ड में भी हमारे अखाड़े का नाम है। इस जमीन पर 1885 में हमने संघर्ष करके उन्हें बाहर कर दिया था, इसके बाद से उनका कोई कब्जा नहीं रहा है। वास्तविक रूप में मस्जिद को प्रयोग करने और मुतवल्ली का कोई सबूत उनके पास नहीं है। आज हिन्दू महासभा के वकील ने कहा, 1858 गवर्मेंट ऑफ इंडिया एक्ट में ब्रिटिश सरकार ने बोर्ड ऑफ कंट्रोल समाप्त कर दिया था। यही नहीं ऐसे में अक्टूबर 1860 मस्जिद को ग्रांट देने का सवाल नहीं उठता, इस मामले में सुन्नी बोर्ड ने गलत बयानी की है।


  • सुप्रीम कोर्ट सुना रहा फैसला

    राम मंदिर व बाबरी मस्जिद विवाद पर आज सुप्रीम कोर्ट अपना फैसला पढ़ रहा है। इस बारे में सबसे बड़ा फैसला यह है कि सुप्रीम कोर्ट ने हिन्दू पक्ष को जमीन का मालिकाना हक दे दिया है। अब मंदिर के लिए सरकार ट्रस्ट बनाएगी। वहीं मुस्लिम पक्ष को मस्जिद के लिए 05 एकड़ की जमीन दी जाएगी। यह फैसला सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस रंजन गोगोई सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए हैं। जल्द ही इस बारे में फैसला पढ़ा जाने वाला है। यह मामला 70 साल से भी ज्यादा पुराना है। रंजन गोगोई 10:30 बजे से फैसला देना शुरू कर देंगे। इस फैसले को देखते हुए अयोध्या समेत पूरे देश में सुरक्षा व्यवस्था सख्त कर दी गई है। सुप्रीम कोर्ट ने 16 अक्टूबर को इस मामले में फैसला सुरक्षित रख लिया था।


    यह रहे हैं बड़े फैसले

    05 एकड़ की जमीन के लिए दी मस्जिद दी जाएगी

    केन्द्र सरकार तीन महीने के अंदर मस्जिद बनाने के लिए जगह देगी

    मुस्लिम समाज को मस्जिद बनाने के लिए मिलेगी दूसरी जगह जमीन

    विवादित जमीन के नहीं होंगे टुकड़ें


    इस बारे में पहला फैसला यह आ रहा है कि इस मामले में शिया वक्फ बोर्ड की याचिका खारिज कर दी गई है। शिया वक्फ बोर्ड ने यह याचिका दी थी कि यहां मस्जिद एक शिया ने बनवाई थी, इसलिए यह जमीन उनकी है। इसे कोर्ट ने खारिज कर दिया है।


    1857 से पहले हिन्दू पूजा के सबूत मिले, मुस्लिम पक्ष नहीं रख पाया सबूत

    विवादित भूमि पर मुस्लिम पक्ष पढ़ते थे नमाज, इस बात के सबूत

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