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अतुल्य भारत

समाज के हर स्याह सच को लेखन का रूप देने वाले थे प्रेमचंद

31 July 2020

एक लेखक कभी मर नहीं सकता, उसकी रचनाएं उसे हमेशा जिंदा रखती हैं। हिंदी साहित्य को एक मुकाम तक पहुंचाने में मुंशी प्रेमचंद का नाम भी शामिल है। अपनी हिंदी और उर्दू की रचनाओं के लिए प्रसिद्ध हुए मुंशी प्रेमचंद् के लेखन में ग्रामीण परिवेश की झलक देखने को मिलती थी। उनकी रचनाओं की वजह से ही उपन्यासकार शरतचंद्र चट्टोपाध्याय ने उन्हें उपन्यास सम्राट की उपाधि दी थी। प्रेमचंद ने जीवन के जिस पहलू को देखा और समझा उसे ही लिखा। 

कलाम: 'सूर्य की तरह चमकने के लिए सूर्य की तरह जलना भी होगा'

27 July 2020

देश के 11वें राष्ट्रपति, मिसाइल मैन, वैज्ञानिक और एक भारत को उन्नत बनाने के पीछे पड़े एपी जे अब्दुल कलाम के प्रति देश के हर वर्ग में बराबर सम्मान था। वो आज का ही दिन था बस साल था 2015 जब मिसाइलमैन ने अवनी अंतिम सांसे ली थीं। उनके विचार आज भी सबके लिए प्रेरणा हैं। देश की सबसे बड़ी संवैधानिक कुर्सी पर बैठने के बावजूद ऐसी सादगी शायद ही किसी में किसी में हों। वैसे तो कलाम के बारे में आपने बहुत पढ़ा होगा, सुना होगा लेकिन आज उनकी पुण्यतिथि पर हम कुछ ऐसे ही किस्से साझा करेंगे जिससे एक बार फिर अंदाजा लगाया जा सकता है कि ये साधारण सा रहने वाला व्यक्ति वास्तिवकता में कितना महान था। 

'नाम आजाद, पिता का नाम स्वतंत्रता, पता जेल '

23 July 2020

चिंगारी आजादी की सुलगी मेरे जश्न में हैं,इन्कलाब की ज्वालाएं लिपटी मेरे बदन में हैं, मैं आजाद हूं।भारत मां के लिए देश के कई वीर सपूतों ने हंसते-हंसते अपनी जान गंवा दी, इन्हीं में शामिल है एक नाम चंद्रशेखर आजाद। ये वो नाम है जिसके आगे अंग्रेजों के भी पसीने छूट जाते थे। एक ऐसा क्रांतिकारी जिसने कसम खाई थी कि उसके जिंदा रहते कोई भी अंग्रेज उसे हाथ तक नहीं लगा।  पाएगा। महज 15 साल की उम्र में असहयोग आंदोलन में शामिल होने वाले आजाद को अपने जीवन में कई बार सलाखों के पीछे जाना पड़ा लेकिन ये जैसे उनके हौसले को और भी मजबूत बना रही थीं। कहते हैं कि उनकी हिम्मत कुछ ऐसी थी कि जब जेल में उनसे पूछताछ की गई तो उन्होंने अपना नाम आजाद, पिता का नाम स्वतंत्रता और पता जेल बताया था। 

जलियांवाला बाग हत्याकांड: इतिहास में दर्ज इस नरसंहार के आज 101 साल हुए पूरे

13 April 2020

13 अप्रैल 1919 आज ही का दिन और बैसाखी का पर्व था जो इतिहास के पन्नों में एक अत्याचार की दास्तां के रूप में दर्ज हो गया। अमृतसर के जलियांवाला बाग में बूढे, बच्चे, महिलाएं, आदमी सभी लोग मौजूद थे और ब्रिगेडियर जनरल रेजीनॉल्ड डायर के नेतृत्व में अंग्रेज सैनिकों ने इन निहत्थों पर गोलियां चला दीं। इस कांड में कई लोगों की मौत हुई, बहुत से लोग घायल हुए और तब से ये दिन नरसंहार की वो कहानी हर साल ही बयां करता है। 

विश्व कठपुतली दिवस: गुलाबो खूब लड़ी, सिताबो खूब लड़ी, जानिए इनका इतिहास

21 March 2020

अरे देखो फिर लड़ै लागीं गुलाबो-सिताबो। आओ हो...देखो बच्चों शुरू हो गईं दोनों। कठपुतली का ये खेल कई लोगों ने अपने बचपन में देखा होगा। कठपुतियों का ये किरदार इतना फेमस था कि हाल ही में इसपर गुलाबो-सिताबो फिल्म भी बन रही है, जिसमें अमिताभ बच्चन मुख्य रोल में हैं।  

जानिए टिक-टिक करती घड़ी का इतिहास कितना है पुराना

13 March 2020

हर किसी की कलाई पर सजने वाली अलग-अलग ब्रांड की घड़ियां अब सिर्फ समय ही नहीं बल्कि फैशन की भी मानक हैं। लेकिन एक समय था जब वक्त देखने के लिए इनको बड़े ही टेक्निक से बनाया जाता था। इन घड़ियों का इतिहास बहुत पुराना है पहले लोग सूर्य की अलग-अलग अवस्थाएं देखकर सुबह, दोपहर और शाम का अनुमान लगाते थे। यही नहीं धूप के कारण पड़ने वाली किसी पेड़ या कोई स्थिर वस्तु की छाया से भी समय का अंदाजा लगाया जाता था। रात के समय का ज्ञान नक्षत्रों से किया जाता था। उसके बाद धीरे-धीरे पानी व बालू से घड़ी बनाई जाने लगी। आइये डालते हैं एक नजर इनके इतिहास पर...

मिर्जा गालिब: वो शायर जिसके सबसे ज्यादा ख़त दुनिया ने पढ़े

15 February 2020

मिर्जा गालिब शायरों के दुनिया का एक बड़ा नाम है जो किसी के परिचय का मोहताज नहीं है। हालांकि उन्होंने अपनी शायरी में फ़ारसी का इस्तेमाल ज्यादा किया है इसलिए ये सभी लोगों की समझ से परे है लेकिन इसके बावजूद भी इनके शेर और गजलें लोगों के दिलों के करीब हैं। उन्होंने हर मौजू पर दिल से लिखा। बात इश्क की हो या फिर खुदा की मिर्जा गालिब का कोई मुकाबला नहीं। उनकी शायरियां आज भी मोहब्बत करने वालों के लिए इजहार का काम करती हैं तो कहीं जिंदगी के फलसफे सुनाती हैं।                                                           'न था कुछ तो ख़ुदा था कुछ न होता तो ख़ुदा होता'

संविधान दिवस 2019 : भारतीय संविधान के बारे में जानें सबकुछ

26 November 2019

हर साल 26 नवंबर को भारत में संविधान दिवस (Constitution Day of India) मनाया जाता है। 26 नवंबर 1949 ही वह तारीख थी जब हमारे देश का संविधान बनकर तैयार हुआ था। इसके दो महीने बाद यानि 26 जनवरी 1950 को ये संविधान देश में लागू भी कर दिया गया। आप में से ज्यादातर लोगों को ये बात पता होगी, लेकिन बताना मेरा फर्ज है कि संविधान को तैयार करने में 2 साल 11 महीने 18 दिन का वक्त लगा था। इसके लिए 29 अगस्त 1947 को भारत के संविधान (Indian Constitution) का मसौदा तैयार करने वाली समिति की स्थापना की गई थी और इसके अध्यक्ष के तौर पर डॉक्टर भीमराव अंबेडकर की नियुक्ति हुई थी। 

कल्पना चावला: भारत की बेटी का जमीन से अंतरिक्ष तक यादगार सफर

01 November 2019

अंतरिक्ष की दुनिया जितनी रोमांचक दिखती है उससे ज्यादा खतरनाक भी होती है। अंतरिक्ष हमेशा से ही मानव के लिए एक पहेली साबित होता रहा है, इसको लेकर समय समय पर देश-विदेश से उपग्रह अंतरिक्ष में खोज के लिए भेजे जाते रहे हैं। ऐसी ही एक खोज के लिए अमेरिका ने अंतरिक्ष में अपना कोलंबिया स्पेस शटल भेजा था, जिसमें भारत की एक बेटी भी थी। जी हां, हम बात कर रहे हैं हरियाणा में जन्मीं कल्पना चावला की। जो अमेरिकी स्पेस प्रोग्राम के तहत अंतरिक्ष तो गईं, लेकिन पृथ्वी लौटते वक्त उनका स्पेस शटल दुर्घटनाग्रस्त हो गया। आज हम आपको कल्पना चावला से जुड़े कुछ अनसुने पहलुओं से वाकिफ कराएंगे।

डॉ एपीजी अब्दुल कलाम: बचपन में अखबार बेचने से लेकर राष्ट्रपति बनने तक का सफर

15 October 2019

आज यानि 15 अक्टूबर का दिन इसलिए खास है क्योंकि इस दिन भारत के मिसाइलमैन और पूर्व राष्ट्रपति डॉक्टर एपीजी अब्दुल कलाम जन्मे थे।  एक महान वैज्ञानिक, शांत व्यक्तित्व के कलाम ने राष्ट्र को विकसित बनाने का हरसंभव प्रयास किया। वो कलाम ही थे जिनके मार्गदर्शन में भारत में सबसे खतरनाक और घातक डिफेंस मिसाइल बनाए गए और दुनिया ने भी भारत की इन शक्तियों का लोहा माना। भारत के 11वें राष्ट्रपति और जाने माने वैज्ञानिक कलाम को बच्चों से खास लगाव था। उन्होंने अपना पूरा जीवन शिक्षा और विज्ञान के क्षेत्र को समर्पित कर दिया। विज्ञान के प्रति उनका प्रेम ही था कि राष्ट्रपति होने के साथ वो वैज्ञानिकों को समय-समय पर सलाह भी देते थे। एपीजे अब्दुल कलाम ने कहा था कि 'अगर तुम सूरज की तरह चमकना चाहते हो तो पहले सूरज की तरह जलना सीखो' 

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