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अतुल्य भारत

डॉ एपीजी अब्दुल कलाम: बचपन में अखबार बेचने से लेकर राष्ट्रपति बनने तक का सफर

15 October 2019

आज यानि 15 अक्टूबर का दिन इसलिए खास है क्योंकि इस दिन भारत के मिसाइलमैन और पूर्व राष्ट्रपति डॉक्टर एपीजी अब्दुल कलाम जन्मे थे।  एक महान वैज्ञानिक, शांत व्यक्तित्व के कलाम ने राष्ट्र को विकसित बनाने का हरसंभव प्रयास किया। वो कलाम ही थे जिनके मार्गदर्शन में भारत में सबसे खतरनाक और घातक डिफेंस मिसाइल बनाए गए और दुनिया ने भी भारत की इन शक्तियों का लोहा माना। भारत के 11वें राष्ट्रपति और जाने माने वैज्ञानिक कलाम को बच्चों से खास लगाव था। उन्होंने अपना पूरा जीवन शिक्षा और विज्ञान के क्षेत्र को समर्पित कर दिया। विज्ञान के प्रति उनका प्रेम ही था कि राष्ट्रपति होने के साथ वो वैज्ञानिकों को समय-समय पर सलाह भी देते थे। एपीजे अब्दुल कलाम ने कहा था कि 'अगर तुम सूरज की तरह चमकना चाहते हो तो पहले सूरज की तरह जलना सीखो' 

भगत सिंह जयंती विशेष : क्रांति की तलवार विचारों की सान पर तेज होती है

28 September 2019

"भगत सिंह एक ऐसे योद्धा थे जिन्होंने खुले मैदान में अपने खतरनाक दुश्मन का सामना किया। वो एक चिंगारी की तरह थे जो बहुत कम वक्त में ज्वाला बन गई और देश के हर कोने में फैले अंधेरे को उसने अपनी लौ से रोशन कर दिया", शहीद भगत सिंह के बारे में ये विचार देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के थे। भगत सिंह आज भी एक आदर्श हैं युवाओं से लेकर बुजुर्गों तक के लिए, एक प्रेरणा हैं उस हर इंसान के लिए जो बदलाव में यकीन रखता है। एक विश्वास हैं उन सबके लिए जिन्हें ये लगता है कि कोशिशें जरूर कामयाब होती हैं और कुछ कर गुजरने की चाहत रखने वालों को जमाना हमेशा याद रखता है। एक उम्मीद हैं हम सबके लिए कि कभी एक और भगत सिंह आएगा जो देश में फैली बुराइयों के खिलाफ एक बार फिर उसी तरह आवाज उठाएगा। इन सबसे बढ़कर एक महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे जिनकी कोशिशों और बलिदान से हम आज आजाद हवा में सांस ले रहे हैं। भगत सिंह का जन्म 28 सितंबर 1907 को बांगा, पाकिस्तान (अविभाजित भारत) में हुआ था। शहीद-ए-आजम भगत सिंह की जयंती है। इस अवसर जानिए उनके कुछ क्रांतिकारी विचार। 

मीर तक़ी मीर : जिसने खुद्दारी में ठुकरा दिए थे आसफउद्दौला के दिए 1000 रुपये

21 September 2019

एक नर्म मिज़ाज शख़्सियत, एक हरफनमौला शायर, एक मुफलिस मगर खुद्दार इंसान और उर्दू शायरी को एक नया मकाम देने वाले मीर को आज लोग भले ही ज़्यादा न जानते हों, लेकिन शायरी में मीर का जो मनसब है वो कोई हासिल नहीं कर सकता।  

शिक्षक दिवसः जानिए डॉ राधाकृष्णन की जिंदगी से जुड़े कुछ दिलचस्प किस्से

05 September 2019

5 सितंबर यानि शिक्षक दिवस भारत के पहले राष्ट्रपति डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्मदिन पर मनाया जाता है। शिक्षक से भारत के राष्ट्रपति तक का पद संभालने वाले डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन की आज 132वीं जयंती है और आज के दिन हम आपको उनकी जिंदगी से जुड़े कुछ किस्से बताते हैं, जिनके बारे में कम ही जानते होंगे।

अमृता प्रीतम: जिनकी नामुकम्मल मोहब्बत के किस्से मशहूर हो गए

31 August 2019

''अब रात घिरने लगी तो तू मिला है, तू भी उदास, चुप, शांत और अडोल, मैं भी उदास, चुप, शांत और अडोल, सिर्फ- दूर बहते समुद्र में तूफान है…'' साहिर और अमृता की प्रेम कहानी को उनके खतों से ही पहचाना जा सकता है। उन्होंने ये बात भी साबित कर दी कि मोहब्बत को सरहदें भी नहीं रोक सकती, कैसे लाहौर और दिल्ली के किसी कोने में बैठे दो दिल एक साथ एक-दूसरे के लिए धड़कते थे, कैसे एक दूसरे की तकलीफों को बिना कहे समझ लेते थे, अपने इश्क को खतों में लपेटकर एक-दूसरे को भेजते थे। अमृता एक ऐसी बेबाक लेखिका थीं जिनकी कलम ने मोहब्बत लिखी, प्यार से बिछड़ने का दर्द लिखा, बंटवारे का मर्म लिखा और तमाम उन लड़कियों के लिए प्रेरणा लिखी जो लोगों के डर से अपनी जिंदगी को दूसरों के मुताबिक जीती हैं। एक ऐसे परिवार में रहने के बावजूद जहां हिंदू और मुस्लिम के बर्तन तक अलग थे, शादी सात जन्मों का बंधन था,अमृता ने दो लोगों से प्यार किया वो भी अलग मजहब के एक मुस्लिम और दूसरा सिख। उन्होंने उन सारी बंदिशों और नियमों को तोड़कर दरकिनार कर दिया जो उस दौर में लड़कियों को मोहब्बत करने की इजाजत नहीं देतीं थीं। पंजाब की एक बागी लेखिका की कविताओं और प्यार के चर्चिम किस्सों ने पूरे देश में क्रांति ला दी थी।

अरुण जेटली का बचपन से लेकर अब तक का सफरनामा

24 August 2019

पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता अरुण जेटली ने शनिवार की दोपहर को एम्स में अंतिम सांस ली। उनका यहां पर 9 अगस्त से इलाज चल रहा था, उन्हें सांस लेने में तकलीफ हो रही थी, जिसकी वजह से उन्हें एम्स में भर्ती कराया गया था। उनके निधन की खबर पर पीएम नरेंद्र मोदी से लेकर विपक्ष के नेताओं ने दु:ख जताया है। बता दें छात्र जीवन से राजनीति की शुरुआत करने वाले अरुण जेटली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'संकटमोचक' रहे। उन्होंने अहम मौको पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बचाव किया और गुजरात से दिल्ली लाने में उनकी अहम भूमिका रही। आइए जानते हैं अरुण जेटली का बचपन से लेकर राजनीतिक सफरनामा।

सुषमा स्वराज: एक कुशल राजनेता बनने के पीछे की पूरी कहानी

07 August 2019

भारतीय राजनीति का सुषमा स्वराज नाम का एक सितारा 6 अगस्त को हमेशा-हमेशा के लिए डूब गया। पूर्व विदेश मंत्री और भारतीय जनता पार्टी की दिग्गज नेता सुषमा स्वराज की मंगलवार रात लगभग 11 बजकर 25 मिनट पर हार्ट अटैक होने से मौत हो गई। सुषमा स्वराज एक ऐसी सशक्त नेता थीं जिन्हें देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी काफी पसंद किया जाता था और इसका कारण उनका स्वयं का व्यक्तित्व था। विदेश में रहने वाले किसी भी भारतीय ने उनसे जब-जब मदद मांगी वो तैयार खड़ी मिलीं। सोशल मीडिया पर सबसे ज्यादा सक्रिय रहने वाली ये महिला नेता आम लोगों की समस्याएं भी वहीं सुनती थीं और उसपर त्वरित कार्यवाही करने से भी नहीं चूकती थीं। यहीं कारण है कि वो लोकप्रिय नेताओं में एक थीं।  

इतिहास से लेकर वर्तमान तक, ये है अयोध्या का पूरा विवाद

06 August 2019

अयोध्या का राम मंदिर और बाबरी मस्जिद विवाद लगभग 70 साल से भी पुराना है, लेकिन इस मामले पर कोई फैसला आज तक नहीं आ सका। आज से सुप्रीम कोर्ट में इस मुद्दे पर रोज चर्चा होगी। सुप्रीम के चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता में पांच न्यायाधीशों की पीठ मिलकर इस मुद्दे पर फैसला देगी। आइए जानते हैं कि बाबरी मस्जिद के बनने से लेकर अभी तक इस अयोध्या विवाद में क्या-क्या हुआ…

मैथिली शरण गुप्त: जिनकी कविताओं ने लोगों में जगाया देशभक्ति का जुनून

03 August 2019

हिंदी साहित्य को बुलंदियों तक पहुंचाने में कई सारे कवियों और लेखकों ने अपना योगदान दिया है लेकिन कुछ कवि ऐसे भी थे जिनकी रचनाओं ने न केवल हिंदी काव्य की परिभाषा बदल दी बल्कि लोगों में साहित्य के प्रति रूचि भी जगाई। ऐसे ही महान राष्ट्र कवि मैथिलीशरण गुप्त थे जिनकी कृतियों में सरलता के साथ-साथ आपको एक नई विधा देखने को मिलेगी। राष्ट्रप्रेम, राष्ट्रीय एकता और राष्ट्ररक्षा का अद्भुत उदाहरण आपको गुप्त जी की कविताओं में देखने को मिलेगा। इसी योगदान के लिए हिंदी साहित्य ने उन्हें 'राष्ट्र कवि' की उपाधि दी गई और ये उपाधि उन्हें राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी ने दी थी। 

रामधारी सिंह दिनकर: एक विद्रोही रचनाकार से राष्ट्रकवि बनने का सफर

24 April 2019

हिंदी साहित्य में राष्ट्र प्रेम और ओजस्वी कविताओं के लिए जाने जाने वाले रामधारी सिंह दिनकर को किसी परिचय की जरूरत नहीं है। हिंदी से प्रेम करने वाला हर व्यक्ति इनसे भी जरूर प्रेम करता होगा। आजादी की लड़ाई से लेकर आजादी मिलने तक के सफर को दिनकर ने बड़े ही सलीके से अपनी कविताओं में पिरोया और यही कारण हैं कि हिंदी साहित्य उन्हें 'राष्ट्रकवि' नाम से नवाजता है।  दिनकर की कविताएं बाकी लेखकों से अलग थीं क्योंकि जहां एक ओर उनमें ऊर्जा, क्रांति ,विद्रोह की ललकार थी तो दूसरी तरफ कोमल श्रृंगारिक भावनाएं भी झलकती थीं। एक लेखक का पल भर में निष्ठुर हो जाना और दूसरे ही क्षण कोमल आसान नहीं था। उनकी यही खूबियां थीं कि आज भी उनकी कविताओं का जादू हम सब पर कायम है। वो कभी एक विचारधारा के समर्थक नहीं रहे और सत्ता के करीब होने के बावजूद भी वो हमेशा जनता से अलग नहीं रहे। एक राष्ट्रकवि का जनकवि भी बने रहना उनकी सबसे बड़र विशेषता थी। 

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