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अतुल्य भारत

विश्व कठपुतली दिवस: गुलाबो खूब लड़ी, सिताबो खूब लड़ी, जानिए इनका इतिहास

21 March 2020

अरे देखो फिर लड़ै लागीं गुलाबो-सिताबो। आओ हो...देखो बच्चों शुरू हो गईं दोनों। कठपुतली का ये खेल कई लोगों ने अपने बचपन में देखा होगा। कठपुतियों का ये किरदार इतना फेमस था कि हाल ही में इसपर गुलाबो-सिताबो फिल्म भी बन रही है, जिसमें अमिताभ बच्चन मुख्य रोल में हैं।  

जानिए टिक-टिक करती घड़ी का इतिहास कितना है पुराना

13 March 2020

हर किसी की कलाई पर सजने वाली अलग-अलग ब्रांड की घड़ियां अब सिर्फ समय ही नहीं बल्कि फैशन की भी मानक हैं। लेकिन एक समय था जब वक्त देखने के लिए इनको बड़े ही टेक्निक से बनाया जाता था। इन घड़ियों का इतिहास बहुत पुराना है पहले लोग सूर्य की अलग-अलग अवस्थाएं देखकर सुबह, दोपहर और शाम का अनुमान लगाते थे। यही नहीं धूप के कारण पड़ने वाली किसी पेड़ या कोई स्थिर वस्तु की छाया से भी समय का अंदाजा लगाया जाता था। रात के समय का ज्ञान नक्षत्रों से किया जाता था। उसके बाद धीरे-धीरे पानी व बालू से घड़ी बनाई जाने लगी। आइये डालते हैं एक नजर इनके इतिहास पर...

मिर्जा गालिब: वो शायर जिसके सबसे ज्यादा ख़त दुनिया ने पढ़े

15 February 2020

मिर्जा गालिब शायरों के दुनिया का एक बड़ा नाम है जो किसी के परिचय का मोहताज नहीं है। हालांकि उन्होंने अपनी शायरी में फ़ारसी का इस्तेमाल ज्यादा किया है इसलिए ये सभी लोगों की समझ से परे है लेकिन इसके बावजूद भी इनके शेर और गजलें लोगों के दिलों के करीब हैं। उन्होंने हर मौजू पर दिल से लिखा। बात इश्क की हो या फिर खुदा की मिर्जा गालिब का कोई मुकाबला नहीं। उनकी शायरियां आज भी मोहब्बत करने वालों के लिए इजहार का काम करती हैं तो कहीं जिंदगी के फलसफे सुनाती हैं।                                                           'न था कुछ तो ख़ुदा था कुछ न होता तो ख़ुदा होता'

संविधान दिवस 2019 : भारतीय संविधान के बारे में जानें सबकुछ

26 November 2019

हर साल 26 नवंबर को भारत में संविधान दिवस (Constitution Day of India) मनाया जाता है। 26 नवंबर 1949 ही वह तारीख थी जब हमारे देश का संविधान बनकर तैयार हुआ था। इसके दो महीने बाद यानि 26 जनवरी 1950 को ये संविधान देश में लागू भी कर दिया गया। आप में से ज्यादातर लोगों को ये बात पता होगी, लेकिन बताना मेरा फर्ज है कि संविधान को तैयार करने में 2 साल 11 महीने 18 दिन का वक्त लगा था। इसके लिए 29 अगस्त 1947 को भारत के संविधान (Indian Constitution) का मसौदा तैयार करने वाली समिति की स्थापना की गई थी और इसके अध्यक्ष के तौर पर डॉक्टर भीमराव अंबेडकर की नियुक्ति हुई थी। 

कल्पना चावला: भारत की बेटी का जमीन से अंतरिक्ष तक यादगार सफर

01 November 2019

अंतरिक्ष की दुनिया जितनी रोमांचक दिखती है उससे ज्यादा खतरनाक भी होती है। अंतरिक्ष हमेशा से ही मानव के लिए एक पहेली साबित होता रहा है, इसको लेकर समय समय पर देश-विदेश से उपग्रह अंतरिक्ष में खोज के लिए भेजे जाते रहे हैं। ऐसी ही एक खोज के लिए अमेरिका ने अंतरिक्ष में अपना कोलंबिया स्पेस शटल भेजा था, जिसमें भारत की एक बेटी भी थी। जी हां, हम बात कर रहे हैं हरियाणा में जन्मीं कल्पना चावला की। जो अमेरिकी स्पेस प्रोग्राम के तहत अंतरिक्ष तो गईं, लेकिन पृथ्वी लौटते वक्त उनका स्पेस शटल दुर्घटनाग्रस्त हो गया। आज हम आपको कल्पना चावला से जुड़े कुछ अनसुने पहलुओं से वाकिफ कराएंगे।

डॉ एपीजी अब्दुल कलाम: बचपन में अखबार बेचने से लेकर राष्ट्रपति बनने तक का सफर

15 October 2019

आज यानि 15 अक्टूबर का दिन इसलिए खास है क्योंकि इस दिन भारत के मिसाइलमैन और पूर्व राष्ट्रपति डॉक्टर एपीजी अब्दुल कलाम जन्मे थे।  एक महान वैज्ञानिक, शांत व्यक्तित्व के कलाम ने राष्ट्र को विकसित बनाने का हरसंभव प्रयास किया। वो कलाम ही थे जिनके मार्गदर्शन में भारत में सबसे खतरनाक और घातक डिफेंस मिसाइल बनाए गए और दुनिया ने भी भारत की इन शक्तियों का लोहा माना। भारत के 11वें राष्ट्रपति और जाने माने वैज्ञानिक कलाम को बच्चों से खास लगाव था। उन्होंने अपना पूरा जीवन शिक्षा और विज्ञान के क्षेत्र को समर्पित कर दिया। विज्ञान के प्रति उनका प्रेम ही था कि राष्ट्रपति होने के साथ वो वैज्ञानिकों को समय-समय पर सलाह भी देते थे। एपीजे अब्दुल कलाम ने कहा था कि 'अगर तुम सूरज की तरह चमकना चाहते हो तो पहले सूरज की तरह जलना सीखो' 

भगत सिंह जयंती विशेष : क्रांति की तलवार विचारों की सान पर तेज होती है

28 September 2019

"भगत सिंह एक ऐसे योद्धा थे जिन्होंने खुले मैदान में अपने खतरनाक दुश्मन का सामना किया। वो एक चिंगारी की तरह थे जो बहुत कम वक्त में ज्वाला बन गई और देश के हर कोने में फैले अंधेरे को उसने अपनी लौ से रोशन कर दिया", शहीद भगत सिंह के बारे में ये विचार देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के थे। भगत सिंह आज भी एक आदर्श हैं युवाओं से लेकर बुजुर्गों तक के लिए, एक प्रेरणा हैं उस हर इंसान के लिए जो बदलाव में यकीन रखता है। एक विश्वास हैं उन सबके लिए जिन्हें ये लगता है कि कोशिशें जरूर कामयाब होती हैं और कुछ कर गुजरने की चाहत रखने वालों को जमाना हमेशा याद रखता है। एक उम्मीद हैं हम सबके लिए कि कभी एक और भगत सिंह आएगा जो देश में फैली बुराइयों के खिलाफ एक बार फिर उसी तरह आवाज उठाएगा। इन सबसे बढ़कर एक महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे जिनकी कोशिशों और बलिदान से हम आज आजाद हवा में सांस ले रहे हैं। भगत सिंह का जन्म 28 सितंबर 1907 को बांगा, पाकिस्तान (अविभाजित भारत) में हुआ था। शहीद-ए-आजम भगत सिंह की जयंती है। इस अवसर जानिए उनके कुछ क्रांतिकारी विचार। 

मीर तक़ी मीर : जिसने खुद्दारी में ठुकरा दिए थे आसफउद्दौला के दिए 1000 रुपये

21 September 2019

एक नर्म मिज़ाज शख़्सियत, एक हरफनमौला शायर, एक मुफलिस मगर खुद्दार इंसान और उर्दू शायरी को एक नया मकाम देने वाले मीर को आज लोग भले ही ज़्यादा न जानते हों, लेकिन शायरी में मीर का जो मनसब है वो कोई हासिल नहीं कर सकता।  

शिक्षक दिवसः जानिए डॉ राधाकृष्णन की जिंदगी से जुड़े कुछ दिलचस्प किस्से

05 September 2019

5 सितंबर यानि शिक्षक दिवस भारत के पहले राष्ट्रपति डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्मदिन पर मनाया जाता है। शिक्षक से भारत के राष्ट्रपति तक का पद संभालने वाले डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन की आज 132वीं जयंती है और आज के दिन हम आपको उनकी जिंदगी से जुड़े कुछ किस्से बताते हैं, जिनके बारे में कम ही जानते होंगे।

अमृता प्रीतम: जिनकी नामुकम्मल मोहब्बत के किस्से मशहूर हो गए

31 August 2019

''अब रात घिरने लगी तो तू मिला है, तू भी उदास, चुप, शांत और अडोल, मैं भी उदास, चुप, शांत और अडोल, सिर्फ- दूर बहते समुद्र में तूफान है…'' साहिर और अमृता की प्रेम कहानी को उनके खतों से ही पहचाना जा सकता है। उन्होंने ये बात भी साबित कर दी कि मोहब्बत को सरहदें भी नहीं रोक सकती, कैसे लाहौर और दिल्ली के किसी कोने में बैठे दो दिल एक साथ एक-दूसरे के लिए धड़कते थे, कैसे एक दूसरे की तकलीफों को बिना कहे समझ लेते थे, अपने इश्क को खतों में लपेटकर एक-दूसरे को भेजते थे। अमृता एक ऐसी बेबाक लेखिका थीं जिनकी कलम ने मोहब्बत लिखी, प्यार से बिछड़ने का दर्द लिखा, बंटवारे का मर्म लिखा और तमाम उन लड़कियों के लिए प्रेरणा लिखी जो लोगों के डर से अपनी जिंदगी को दूसरों के मुताबिक जीती हैं। एक ऐसे परिवार में रहने के बावजूद जहां हिंदू और मुस्लिम के बर्तन तक अलग थे, शादी सात जन्मों का बंधन था,अमृता ने दो लोगों से प्यार किया वो भी अलग मजहब के एक मुस्लिम और दूसरा सिख। उन्होंने उन सारी बंदिशों और नियमों को तोड़कर दरकिनार कर दिया जो उस दौर में लड़कियों को मोहब्बत करने की इजाजत नहीं देतीं थीं। पंजाब की एक बागी लेखिका की कविताओं और प्यार के चर्चिम किस्सों ने पूरे देश में क्रांति ला दी थी।

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