...तो इस तरह भारत की हो गई चांदी

अगर आपके गुरु खुद कहें आपने यह मैच हारा नहीं, सिल्वर जीता है तो इससे बड़ी बात क्या होगी? भारत को ओलंपिक में दूसरा पदक दिलाने वाली पीवी सिंधू के गुरु पी गोपीचंद का सीना इस समय जरूर 56 इंच का हो गया होगा। लंदन ओलंपिक में साइना नेहवाल ने गोपीचंद के नेतृत्व में ही कांस्य पदक जीता था। इस बार रियो ओलंपिक में भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी पीवी सिधु ने रजत पदक जीता है।
स्पेन की कैरोलिना मारिन ने दी मात
पीवी सिंधू ने 31वें ओलंपिक खेलों मे रजत पदक जीतकर देश को दूसरा पदक दिलाया। उन्हें शुक्रवार को महिला एकल वर्ग के फाइनल में स्पेन की कैरोलिना मारिन ने मात देकर स्वर्ण पदक हासिल किया। सिंधू को रजत पदक से संतोष करना पड़ा। रियोसेंटर पवेलियन-4 में खेले गए मुकाबले में विश्व की सर्वोच्च वरीयता प्राप्त महिला खिलाड़ी मारिन ने सिंधू को 19-21, 21-12, 21-15 से मात देकर स्वर्ण पदक हासिल किया।
फाइनल में पहुंचने वाली पहली भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी
सिंधू का यह पहला ओलंपिक था और उन्होंने अपने पहले ओलंपिक में इतिहास रच दिया। वह फाइनल में पहुंचने वाली पहली भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी हैं। साथ ही बैडमिंटन में भारत को रजत पदक दिलाने वाली भी पहली खिलाड़ी हैं। इससे पहले लंदन ओलंपिक 2012 में पांचवीं वरीयता प्राप्त सायना नेहवाल ने देश को बैडमिंटन में पहला पदक दिलाया था। उन्होंने कांस्य पदक अपने नाम किया था। मारिन ने पहला गेम हारने के बाद लगातार दो गेम जीतकर स्वर्ण जीता।
सोने की उम्मीद लेकर मैदान पर उतरी सिंधू ने स्पेनिश खिलाड़ी को अच्छी टक्कर दी। मारिन ने पहले गेम की अच्छी शुरुआत की और 4-2 से बढ़त ले ली। सिंधू गेम की शुरुआत में मारिन के खेल को समझ नहीं पाईं और इसी का फायदा उठाते हुए मारिन ने 11-16 से बढ़त ले ली। ब्रेक के बाद सिंधू ने तीन अंक हासिल किए और स्कोर 9-13 कर दिया। वह अभी भी स्पेनिश खिलाड़ी से पीछे थीं। 10वीं वरीयता प्राप्त सिंधू ने यहां से जबरदस्त खेल दिखाया और अंक हासिल करती रहीं। एक समय वह 16-17 से पीछे थीं। यहां उनके पास बराबरी करने का मौका आया, लेकिन सिंधू ने इसे गंवा दिया। मारिन 18-16 से आगे हो गईं।
भारतीय खिलाड़ी ने हार नहीं मानी और तीन अंक लेते हुए स्कोर 19-19 से बराबर कर लिया। गेम जीतने के करीब सिंधू ने कोई मौका नहीं गंवाया और लगातार दो अंक हासिल करते हुए 21-19 से पहला गेम जीता। यह गेम 27 मिनट तक चला। आखिरी के दो गेम स्पेनिश खिलाड़ी के विश्वस्तरीय खेल का बेहतरीन नमूना थे। दूसरे गेम में मारिन ने एकतरफा जीत हासिल की। मारिन ने लगातार चार अंक हासिल किए और 4-0 से आगे हो गईं। सिंधू ने एक अंक हासिल कर वापसी की कोशिश की, लेकिन मारिन ने तब तक स्कोर 11-2 कर दिया।
हालांकि, सिंधू ने हार नहीं मानी और कुछ अंक हासिल किए, लेकिन तब तक काफी देर हो गई थी। मारिन ने 15-7 से बढ़त ले ली जिसे कायम रखते हुए उन्होंने 21-12 से गेम अपने नाम किया और मुकाबला तीसरे गेम में ले गईं। यह गेम 22 मिनट तक चला। तीसरे और निर्णायक गेम में दोनों खिलाड़ियों ने शानदार खेल दिखाया। मारिन एक बार फिर सिंधू पर हावी हो गईं और देखते देखते 6-1 से बढ़त ले ली, जिसे उन्होंने कुछ देर में ही 9-4 कर दिया। लग रहा था कि यह गेम भी दूसरे गेम की तरह एकतरफा साबित होगा, लेकिन तभी सिंधू ने लगातार चार अंक हासिल करते हुए स्कोर 9-8 किया और फिर 10-10 से बराबरी कर ली। यहां से स्पेनिश खिलाड़ी ने अपने आक्रामक खेल को और धार दी और सिंधू को पेरशान किया। सिंधू के पास मारिन की चालाकी और तेजी का कोई जवाब नहीं था। देखते-देखते वह 15-11 से आगे हो गईं। सिंधू ने अंकों के अंतर को पाटने और आगे निकलने का भरसक प्रयास किया लेकिन अंतत: वह 31 मिनट तक चले इस गेम में 21-15 से हार बैठीं और स्वर्ण जीतने का मौका उनके हाथ से फिसल गया।
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