कुछ लोग संघर्षों का सामना करके इतने मजबूत हो जाते हैं कि फिर दुनिया को भी उनके दम का लोहा मानना पड़ता है। अनाथाश्रम में पले-बढ़े सागर रेड्डी ने अपनी जिंदगी भले ही फुटपाथ पर गजारी हो लेकिन उनकी ये कोशिश रही कि बाकी अनाथ बच्चों की जिंदगियां संवर जाए। 

अपने जैसे एक हजार से अधिक युवाओं को मुख्य धारा से जोड़ने वाले एकता निराधार संघ के सागर रेड्डी को सोमवार को यशवंत राव केलकर पुरस्कार से सम्मानित किया गया। आगरा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उन्हें यह सम्मान दिया और इस दौरान उनकी कहानी सुनकर मुख्यमंत्री भावुक भी हो गए। सागर रेड्डी एक साल के थे जब उनके माता-पिता की हत्या कर दी गई थी। 10 साल तक सागर एक अनाथाश्रम में रहे। वहीं एक संस्था की मदद से उन्होंने इंजीनियरिंग की। इंजीनियरिंग करने के बाद जब सागर दोबारा उस अनाथाश्रम में गए तो उन्हें लगा कि हर अनाथ के जीवन में कोई मसीहा नहीं आता। उसके बाद ही उन्होंने एक एकता निराधार संस्था बनाई। 

इस संस्था के हत अब तक 1128 अनाथ बच्चों की पढ़ाई पूरी हुई है और 62 लड़कियों की शादी हुई है, 478 अनाथ बच्चों को गोद लिया गया है। संस्था इन बच्चों को आरक्षण दिलाने के लिए भी लगातार कोशिश कर रही है। महाराष्ट्र सरकार इनके लिए एक फीसदी आरक्षण की व्यवस्था की है। एक कमरे में 72 अनाथ बच्चों के साथ शुरू हुई इस संस्था का काम अब हैदराबाद, बंगलुरू, हुबली, रायचूर व औरंगाबाद में भी चल रहा है। यहां पर अनाथ बच्चों को आत्मनिर्भर भी बनाया जाता है। 

सागर रेड्डी के इस प्रयास के लिए सीएम योगी ने उन्हें यशवंत केलकर पुरस्कार से सम्मनित किया है। कार्यक्रम के दौरान सागर रेड्डी ने छात्रों को सक्सेस मंत्र भी दिया कि सफलता सिर्फ एक दिन में नहीं मिलती लेकिन एक दिन जरूर मिलती है। सागर रेड्डी की संघर्ष की कहानी सुनकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भावुक हो गए। रेड्डी ने कहा जब 18 साल अनाथालय में रहने वाले युवक को निकाला जाता है तो उसके मन की पीड़ा को कोई नहीं समझ सकता, कई लड़कियां देह व्यापार के लिए मजबूर हो जाती हैं और आत्महत्या कर लेती हैं। 

मुख्यमंत्री ने कहा, रेड्डी की कहानी प्रेरणा देने वाली है, हर युवा को देश के लिए कोई न कोई जिम्मेदारी लेनी चाहिए। 

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