संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) ने शुक्रवार की शाम को सिविल सर्विसेज एक्जाम का परीक्षा परिणाम घोषित कर दिया है। यूपीएससी की तरफ से घोषित किए गए परिणाम में रायबरेली के लाल ने भी जिले का नाम रोशन किया है। मेहनत और जुनून ने इसरो साइंटिस्ट को अब अफसर बना दिया है। बिना किसी कोचिंग के सफलता अर्जित करन करने वाले उस जूनियर साइंटिस्ट ने साबित कर दिया कि अगर सच्ची मेहनत, बेहतर रणनीति और लगन के साथ में पढ़ाई की जाए तो बिना कोचिंग के भी यूपीएससी को फतेह किया जा सकता है।

यूपीएससी में 195वीं रैंक लाकर जिले का नाम रोशन करने वाले है इसरो में जूनियर साइंटिस्ट रविराज अवस्थी। रायबरेली के प्रकाश नगर मोहल्ले में रहने वाले रविराज अवस्थी के पिता वीरेंद्र कुमार अवस्थी विकास भवन में वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी के पद से सेवानिवृत्त हुए है। उनकी मां सुमन अवस्थी गृहणी है और बहन रायबरेली में ही प्राइमरी में सहायक अध्यापिका है। रविराज के घर पर शुरू से ही पढ़ाई-लिखाई का बढ़िया माहौल रहा है। रविराज की दसवीं तक की पढ़ाई रायबरेली के रॉयन इंटर कॉलेज से हुई है। इसके बाद इंटरमीडिएट की पढ़ाई शहर के सेंट पीटर्स स्कूल से की। इसके बाद रविराज ने जेईई मेंस में सफलता अर्जित और इंडियन इंस्टिट्यूट आफ टेक्नोलॉजी (आईआईटी) इंदौर से बीटेक किया। 

आईआईटी इंदौर से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने वाले रविराज का चयन पढ़ाई समाप्त ही कैंपस से ही इंडियन स्पेस रिसर्च आर्गनाइजेशन (इसरो) में चयन हो गया है। यहां पर चयन के बाद में उनका मन यूपीएससी की तरफ बढ़ा और पहले ही प्रयास में सफलता अर्जित कर ली। रविराज की इस कामयाबी पर परिवार ही नहीं नाते-रिश्तेदारों के अलावा मोहल्ले के लोगों में भी बहुत खुशी है। आखिर उनके परिवार में भी बेटे ने यूपीएससी फतेह कर ली है। बेटे की कामयाबी पर पिता ने कहा कि हमारी भी इच्छा थी कि हमारा बेटा देश की सबसे बड़ी सेवा में अफसर बने। आज बेटे ने कामयाबी पाकर गर्व से सीना चौड़ा कर दिया है। रविराज हमेशा ही कहा करता था कि मैं एक दिन पापा आईएएस की परीक्षा पास जरूर करूंगा। बेटे ने आज यह कमाल कर दिखाया है।

पहले ही प्रयास में अर्जित की सफलता

इंडियन स्पेस रिसर्च आर्गनाइजेशन (इसरो) में इस समय जूनियर साइंटिस्ट के पद कार्यरत रविराज अवस्थी ने अपने पहले ही प्रयास में यह सफलता अर्जित की है। उन्होंने इस परीक्षा के लिए किसी भी प्रकार की कोचिंग नहीं की। उन्होंने सेल्फ स्टडी करके यह मुकाम हासिल किया है। उन्होंने बताया कि इसरो में आने के बाद देश की सबसे बड़ी परीक्षा मानी जाने वाली यूपीएससी देने का विचार आया है। उन्होंने बताया कि पिछले कई सालों का परीक्षा पैटर्न और सिलेबस को समझने के बाद मैंने सेल्फ तैयारी शुरू कर दी। उन्होंने बताया कि नौकरी में होने की वजह से समय कम मिल पाता थी, इसी वजह से कोचिंग क्लास जाना नहीं हो पाया। उन्होंने बताया कि पढ़ाई को घंटों में गिनने से कहीं ज्यादा हमने अपनी गुणवत्ता पर ध्यान दिया। उन्होंने बताया कि मेंस के लिए कुछ कोचिंगों की टेस्ट सीरीज का सहारा लिया गया था। इसके अलावा साक्षात्कार में भी कुछ टीचर्स का मार्गदर्शन लिया गया था ताकि इंटरव्यू में बेहतर किया जा सकें। 

रविराज को आईपीएस से ज्यादा आईएफएस बनने की चाह

पहली ही बार में यूपीएससी में सफलत अर्जित करने वाले रविराज आईएएस बनना चाहते थे, लेकिन रैंक कम होने के कारण पहले प्रयास में आईएएस नहीं मिल पाएगा। रविराज ने बताया कि रैंक के हिसाब से मुझे भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) में जाने का मौका मिल सकता है। उन्होंने बताया कि आईएएस के बाद मेरी प्राथमिकता भारतीय विदेश सेवा (आइएफएस) रही है और मैंने अपने पद चयन में दूसरे नंबर पर आईएफएस को ही डाला था। उन्होंने कहा कि अगर मुझे इस बार यह पद नहीं मिलता है तो एक बार फिर से परीक्षा देकर मैं आईएफएस के लिए प्रयास करूंगा।

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