बचपन से ही अंतरिक्ष पर घूमने की इच्‍छा रखने वाली भारतीय मूल की पहली महिला अंतरिक्ष यात्री कल्‍पना चावला का आज जन्‍मदिन है। कल्पना के पिता उन्हें डॉक्टर या टीचर बनाना चाहते थे। परिजनों के अनुसार बचपन से ही कल्पना की दिलचस्पी अंतरिक्ष और खगोलीय परिवर्तन में थी। वह अक्सर अपने पिता से पूछा करती थीं कि ये अंतरिक्षयान आकाश में कैसे उड़ते हैं? क्या मैं भी उड़ सकती हूं? पिता उनकी इस बात को हंसकर टाल दिया करते थे। लेकिन पापा के सपनों को न पूरा कर नासा में काम करके अपना सपना साकार करने वाली कल्‍पना ने उससे कही अधिक नाम पूरे विश्‍व में कमा लिया जो शायद वह एक डॉक्‍टर या टीचर बनकर ना कमा पाती। 

अमर होकर अपनी अमिट छाप लोगों के दिलों में छोड़ने वाली कल्‍पना चावला को आज पूरा देश याद कर रहा है। कल्‍पना को लोग एक मिसाल के रुप में याद करते हैं। कल्‍पना का नाम आज की पीढ़ी तो क्या आने वाली कोई भी पीढ़ी कभी नहीं भूल पाएंगी। कल्पना ने न सिर्फ अंतरिक्ष की दुनिया में उपलब्धियां हासिल की, बल्कि तमाम छात्र-छात्राओं के सपनों को जीना सिखाया। 

करनाल से लेकर अमेरिका तक कल्‍पना ने की पढ़ाई

भारतीय अंतरिक्ष यात्री का गौरव हासिल करने वाली अंतरिक्ष यात्री कल्पना चावला का आज 56वां जन्मदिवस है। उनका जन्म आज के ही दिन 1962 को हरियाणा के करनाल में हुआ था। कल्पना के पिता का नाम बनारसी लाल चावला और मां का नाम संज्योती चावला हैं। कल्पना का घर का नाम मोंटू था और वह अपने चार भाई-बहनों में सबसे छोटी थीं। कल्पना जब कक्षा आठ में थी तभी अपने पापा से इंजीनियर बनने की इच्‍छा जाहिर की थी। जबकि कल्‍पना के पिता डॉक्‍टर या टीचर बनाना चाहते थे। अपनी उड़ान को भरने के लिए  साल 1982 में चंडीगढ़ से इंजीनियरिंग करने चली गई। जहां उन्होंने एरोनॉटिकल इंजीनियरिंग की डिग्री प्राप्त की। कल्पना ने टैक्सस यूनिवर्सिटी से एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में एमटेक की पढ़ाई पूरी की। अमेरिका जाकर कल्पना ने साल 1984 में टेक्सास की यूनिवर्सिटी से एयरोस्पेस इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की। यही पर रहते हुए कल्पना चावला की शादी फ्रांस के जॉन पीयर से हुई थी, जोकि एक फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर थे। एम.टेक की पढ़ाई के दौरान ही कल्पना को जीन-पियर हैरिसन से प्यार हो गया। बाद में दोनों ने शादी भी कर ली। इसी दौरान उन्हें 1991 में अमेरिका की नागरिकता भी मिल गई थी। 

1988 में नासा से जुड़ी थी कल्‍पना

एयरोस्‍पेस की डिग्री हासिल करने के बाद साल 1988 में वो नासा अनुसंधान के साथ जुड़ गई। जिसके बाद 1995 में नासा ने अंतरिक्ष यात्रा के लिए कल्पना चावला का चयन किया। उन्होंने अंतरिक्ष की प्रथम उड़ान एस टी एस 87 कोलंबिया शटल से संपन्न की। अपने पहले मिशन के दौरान कल्पना ने 1.04 करोड़ मील सफर तय करते हुए करीब 372 घंटे अंतरिक्ष में बिताए और इस दौरान धरती के कुल 252 चक्कर भी लगाए। इसकी अवधि 19 नवंबर 1997 से 5 दिसंबर 1997 थी। कल्पना ने सन् 1993 में नासा में पहली बार अप्लाई किया था, तब उन्हें रिजेक्ट कर दिया गया था लेकिन कल्पना ने हार नहीं मानी।

1 फरवरी 2003 को दुनिया से अलविदा हो गई कल्‍पना

41 साल की उम्र में अपनी पहली अंतरिक्ष यात्रा की जो आखिरी साबित हुई। उनके वे शब्द सत्य हो गए जिसमें उन्होंने कहा था कि मैं अंतरिक्ष के लिए ही बनी हूं। हर पल अंतरिक्ष के लिए ही बिताया है और इसी के लिए मरूंगी। अंतरिक्ष की पहली यात्रा के दौरान उन्होंने अंतरिक्ष में 372 घंटे बिताए और पृथ्वी की 252 परिक्रमाएं पूरी की। इस सफल मिशन के बाद कल्पना ने अंतरिक्ष के लिए दूसरी उड़ान कोलंबिया शटल 2003 से भरी। 1 फरवरी 2003 को कोलंबिया स्पेस शटल के दुर्घटनाग्रस्त होने के साथ कल्‍पना की उड़ान रुक गई लेकिन आज भी वह दुनिया के लिए एक मिसाल है। पहली यात्रा में सफल होने के बाद सन् 2000 में कल्पना का सिलेक्शन दूसरी बार स्पेस यात्रा के लिए हुआ। यह मिशन तीन साल लेट होने के बाद 2003 में लांच हो सका। 16 जनवरी 2003 को कोलंबिया फ्लाइट STS 107 से दूसरे मिशन की शुरुआत हुई। 16 दिन का अंतरिक्ष मिशन था, जो पूरी तरह से विज्ञान और अनुसंधान पर आधारित था। 1 फरवरी 2003 को धरती पर वापसी आने के क्रम में स्पेस शटल की पृथ्‍वी की कक्षा में प्रवेश करते ही तकनीकी दिक्कत आने की वजह से नष्ट हो गया। इसमें कल्पना सहित सभी 6 मेंम्बर्स मारे गए। अंतरिक्ष यान में सवार सातों यात्रियों के अवशेष टेक्सास नामक शहर पर गिरे। 

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