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सोसाइटी

nikita kaul

सैनिक पति को I LOVE YOU कह कर अंतिम विदाई करने वाली पत्नी करेगी आर्मी ज्वाइन

21 February 2020

अपनी मिट्टी से प्यार करने वाले ही असली दिवाने होते हैं और देश भक्ति के जुनून को मौत भी नहीं रोक सकती है। कुछ ऐसा ही उदाहरण पेश कर रही है पुलवामा हमले में शहीद हुए मेजर विभूति शंकर ढौंडियाल की पत्नी निकिता कौल।पति के शहीद होने के बाद पूरी तरह से टूट चुकी उनकीं पत्नी निकिता ने अपने फैसले से साबित कर दिया है कि जिसके खून में देश का प्रेम दौड़ता है उसके लिए मौत भी बस एक पड़ाव की तरह होता है। अपने पति के बाद अब निकिता कौल भी देश और अपनी मिट्टी की सेवा करना चाहती हैं। इसलिए कश्मीर की रहने वालीं निकिता ने शॉर्ट सर्विस कमीशन (SSC) की परीक्षा और इंटरव्यू पास कर लिया है। अब उन्हें बस मेरिट लिस्ट का इंतजार है, जिसके बाद वह भारतीय सेना से जुड़ जाएंगी।

इस रेडियो क्लब की वजह से 30 साल बाद मां से मिल पाएंगे बेटे

21 February 2020

वैसे, तो रेडियो अब बीते जमाने की बात होती जा रही है, लेकिन अभी भी ग्रामीण इलाकों में मनोरंजन का केंद्र यही है। ऐसे ही यहां पर बने रेडियो क्लब ने एक दिन बहुत बड़ा काम कर दिखाया, जब क्लब ने 30 साल बाद एक मां को मिला दिया। मां के साथ मिलने का क्षण दिवास्वप्न जैसा था क्योंकि 30 साल बाद मां अपने बेटों से मिली थी। बेटों को देखने के बाद मां की आंखें छलक आई। बेटों के साथ मिलाने का यह स्वर्णिम अवसर उस मां को बंगाल रेडियो क्लब के सदस्यों की वजह से मिला। 

farmer ganapati bhatt,

नारियल और सुपारी के पेड़ों पर चढ़ना हुआ आसान, इस किसान ने बनाई "ट्री-बाइक"

17 February 2020

नारियल और सुपारी के पेड़ों पर चढ़ने किसानों को हो रही दिक्कतों को देखते हुए अब एक किसान ने इसका तरीका खोज लिया है। नारियल को तोड़ने में किसानों को किसी भी प्रकार की दिक्कत न हो, इसके लिए एक किसान ने "ट्री-बाइक" बनाई है। कर्नाटक के साजिपामुडा गांव के किसान गणपति भट्ट ने एक "ट्री-बाइक" बनाई है, उनकी तरफ से बनाई गई बाइक से तेजी और सुरक्षित ढंग से सुपारी के पेड़ पर चढ़ा-उतरा जा सकता है। 

doc subhas patil

14 साल जेल में काटने के बाद अब बने एमबीबीएस डॉक्टर

15 February 2020

किसी ने सही कहा है कि पढ़ने की कोई उम्र नहीं होती जब जागो तभी सवेरा। जेल की सजा काट रहे कैदी सुभाष पाटिल ने ये बात सच साबित कर दी। हत्या के मामले में जेल में बंद सुभाष ने अपनी MBBS की पढ़ाई पूरी करके डॉक्टर की डिग्री ले ली है। सुभाष पाटिल का शुरू से सपना था कि वह डॉक्टर बने लेकिन हत्या के केस में वो 2002 में जेल चले गए। उस वक्त वह एमबीबीएस कोर्स के तीसरे साल की पढ़ाई कर रहे थे। सुभाष पाटिल इस समय 40 साल के हैं। कर्नाटक के कलबुर्गी के अफजलपुरा के रहने वाले सुभाष ने मेडिकल की पढ़ाई शुरू की लेकिन 2002 में पुलिस ने हत्या के आरोप में उन्हें गिरफ्तार कर लिया और 2006 में उन्हें सजा सुनाई गई थी। सुभाष ने एक इंटरव्यू में बताया कि 'मैंने 1997 में MBBS में एडमिशन लिया था। लेकिन 2002 में मुझे जेल हो गई थी। मैं जेल की OPD में काम करता था और अच्छे आचरण की वजह से 2016 में मुझे छोड़ दिया गया। मैंने अपना ये सपना MBBS 2019 में पूरा कर किया।'

जब बुजुर्ग को नहीं मिला खून, तो स्वास्थ्य मंत्री ने स्वयं किया रक्तदान

15 February 2020

ये तस्वीर बहुत सुकून देने वाली है और जनप्रतिनिधियों की जनता सेवा की हकीकत भी बताती है। जी हां, रक्त डोनेट करने वाले व्यक्ति और कोई नहीं बल्कि झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री है। जिनसे राजेंद्र इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (रिम्स) में औचक निरीक्षण के दौरान ही बुजुर्ग व्यक्ति ने अपनी पत्नी के लिए रक्तदान करने की मांग की, तो उन्होंने बिना किसी देर के रक्तदान किया। 

nistha dudeja

कौन हैं पहली मिस डेफ एशिया का ख़िताब जीतने वाली निष्ठा जुडेजा

13 February 2020

अगर इंसान अपनी अक्षमताओं को नजरअंदाज कर दे तो वो सबकुछ हासिल कर सकता है जिसका उसने कभी सपना देखा होगा। ऐसा ही कुछ कर दिखाया निष्ठा डुडेजा ने जो 100 फीसदी बधिर हैं लेकिन अपनी इस कमी को उन्होंने कमजोरी न समझकर ढाल बनाया। वो पिछले 18 साल में मिस डेफ़ एशिया का ख़िताब जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनीं। जूडो और टेनिस के बाद उन्होंने ब्यूटी जगत में भी सफलता पाकर ये साबित कर दिया कि वो किसी से कम नहीं। निष्ठा बचपन से ही अलग-अलग एक्टीविटीज में भाग लेने की शौकीन थीं लेकिन सुन न पाने की वजह से कई बार उनको मौका नहीं मिल पाया। निष्ठा स्पीच थेरेपी लेती रहीं और इसके साथ ही वो 7 साल की उम्र में जूडो भी सीखनी लगी। निष्ठा वो सबकुछ सीखना चाहती थीं जो उन्हें पसंद था। जूडो के बाद उन्होंने टेनिस खेलना भी शुरू किया। निष्ठा का पूरा दिन थकान भरा रहता था लेकिन इसके बावजूद वो सारी एक्टीविटीज को बराबर टाइम देती थीं। 

देश के लिए गोपाल ने ठुकराया 3 बार नासा का ऑफर, ट्रम्प के बुलावे पर नहीं गए अमेरिका

04 February 2020

देश की सेवा करने के खातिर बिहार के भागलपुर के ध्रुवगंज गांव में रहने वाले 19 वर्षीय गोपाल कुमार ने 3 बार नासा का ऑफर ठुकरा दिया है। यही नहीं, गोपाल की प्रतिभा को देखते हुए अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भी न्योता दिया, लेकिन गोपाल टस-से-मस नहीं हुए। गोपाल का कहना है कि देश की ही सेवा करना मेरा लक्ष्य है। मैं देश की हमेशा ही सेवा करना चाहता हूं। यही नहीं, अब गोपाल ने हर साल देश के 100 बच्चों को मदद देने का फैसला किया है। इस पर उन्होंने काम करना शुरू भी कर दिया है। उन्होंने 8 बच्चों के आविष्कार का उन्होंने प्रोविजनल पेटेंट भी करवाया। बिहार के रहने वाले गोपाल देहरादून के सरकारी ग्राफिक एरा इंस्टीट्यूट की लैब में टेस्टिंग कर रहे हैं। यही नहीं, भविष्य में वह झारखंड में लैब बनाकर वहां रिसर्च करेंगे।

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नौकरी छोड़कर शुरू की लहसुन की खेती आज कमा रहे हैं लाखों रुपए

28 January 2020

मध्य प्रदेश के गुरुप्रसाद ने जब सरकारी नौकरी छोड़कर खेती करना शुरू किया था तो उन्हें नहीं पता था कि ये खेती उनके लिए मुनाफे का सौदा साबित होगी। पिता के पास खेत तो थे लेकिन छिंदवाड़ा के गांव में पानी की समस्या होने के कारण खेती करना मुश्किल हो रहा था। खेती में शुरूआती समय से ही घाटा झेल रहे पिता कभी नहीं चाहते थे कि बेटा भी किसान बने वो चाहते थे कि पढ़ाई पूरी करके वो कोई नौकरी में लग जाए। गुरु प्रसाद ने एमए और डी एड में डिप्लोमा किया और एक स्कूल में बच्चों को पढ़ाने लगे, लेकिन सैलरी कम थी और परिवार में कुल सदस्य चार। सबका खर्चा निकालना नौकरी से मुश्किल हो रहा था। गुरु प्रसाद ने बताया कि एक नौकरी से पूरे घर का खर्चा चलना मुमकिन नहीं था और ये रात दिन मेरे लिए एक चिंता का विषय था। मेरे पास खेत भी थे लेकिन खेती का कोई अनुभव नहीं था। 

फल बेचकर शिक्षा की अलख जाने वाले को मिला 'पद्मश्री'

27 January 2020

दक्षिण भारत में फल बेचकर निरक्षरों को साक्षर बनाने वाले हरेकाला हजाब्बा को उनकी मेहनत का तोहफा मोदी सरकार ने दिया है। इस साल घोषित हुए पदम पुरस्कारों में कर्नाटक के दक्षिण कन्नड़ जिला के फल विक्रेता फल विक्रेता का भी नाम शामिल है। 68 वर्षीय हरेकाला हजाब्बा फल की छोटी सी दुकान चलते हैं और यहां पर होने वाली कमाई से अपने गांव में बच्चों के लिए प्राथमिक और माध्यमिक स्कूल बना दिया है। यही नहीं, अब आगे उनकी योजना गांव में ही एक विश्वविद्यालय भी बनवाने की है। 

kerala mosque

केरल की इस मस्जिद ने पेश की एकता की मिसाल, मस्जिद में गूंजे मंत्रोच्चारण

20 January 2020

क्या आपने कभी मस्जिद में मंत्रों के उच्चारण होते हुए सुने हैं, यकीनन आप हैरान हो गए होंगे लेकिन ये सच है। केरल के एक मस्जिद ने सामाजिक सौहार्द की मिसाल पेश करते हुए ये कर दिखाया है। केरल के अलप्पुझा जिले के कयामकुलम की एक मस्जिद में हिंदू जोड़े ने हिंदू रीति रिवाजों के साथ शादी की। मस्जिद कमेटी को जब पता चला कि लड़की की मां के पास शादी में खर्च करने के लिए पैसे नहीं हैं तो कमेटी ने फैसला किया वो मदद के लिए आगे आएंगे। मस्जिद में ही महिला की शादी पूरे रीति रिवाज से कराई गई। परिसर के अंदर दूल्हा-दूल्हन ने सात फेरे लिए और मंत्रों के उच्चारण के साथ शादी के पवित्र बंधन में बंध गए।  

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