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खुले बद्री-केदारनाथ के कपाट, तस्वीरों में करें दर्शन

खुले बद्री-केदार के कपाट

खुले बद्री-केदार के कपाट

आज बद्रीनाथ के भी सुबह-सुबह कपाट खुलने के साथ ही चार धाम की तीर्थयात्रा शुरू हो गई है। चार धाम में अंतिम बद्रीनाथ के भी कपाट ठीक सुबह ठीक 4 बजकर 30 मिनट पर शिव भक्तों के लिए खोल दिए गए हैं।  इसके पहले 18 अप्रैल अक्षय तृतीया के दिन दो धाम-गंगोत्री और यमुनोत्री के कपाट पहले ही खोले जा चुके हैं।

आज सुबह 4 बजकर 30 पर खुले द्वार

आज सुबह 4 बजकर 30 पर खुले द्वार

लगभग 11500 फीट ऊंचाई पर स्थित केदारनाथ में भगवान के 11वें स्वयंभू ज्योर्तिलिंग की पूजा-अर्चना की जाती है। साल 2013 में आई प्राकृतिक आपदा के बाद केदारनाथ की यात्रा के लिए कम श्रद्धालु पहुंच रहे थे। हालांकि इस साल के पहले दिन ही रिकॉर्ड संख्या में भक्तों के पहुंचने से यह बात साफ हो जाती है कि इस साल काफी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद की जा सकती है।

केदारनाथ में उमड़ रही भक्तों की भीड़

केदारनाथ में उमड़ रही भक्तों की भीड़

इसके साथ ही कपाट खुलने के बाद उमड़े भक्तों की भीड़ ने भी एक नया रिकॉर्ड कायम कर दिया। पहले ही दिन लगभग 25073 श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन के लिए पहुंच गए, जो अपने आप में नया रिकॉर्ड है। जैसे ही मंदिर के कपाट खुले पूरी केदारनगरी भगवान शिव के जयकारों से गूंज उठा। अब अगले छह माह तक यहीं पर देश-विदेश के श्रद्धालु बाबा केदार के दर्शन करेंगे।

केदारनाथ त्रासदी के बाद कम हो गया था श्रद्धालुओं का आना

केदारनाथ त्रासदी के बाद कम हो गया था श्रद्धालुओं का आना

केदारनाथ त्रासदी के बाद लोग यहां डर से कम आने लगे थे। आपदा के लगभग तीन माह तक हर तरह सन्नाटा था, जिसके बाद 11 सितंबर 2013 को केदारनाथ की यात्रा फिर से शुरू की जा सकी थी। पहले दिन कुछ सौ की संख्या में ही भक्त दर्शन के लिए पहुंचे थे, मगर फिर यात्रा खत्म होने तक 48 हजार भक्त दर्शन के लिए केदारनाथ आ चुके थे।

मंदिर में शुरू हुई आरती व पूजा

मंदिर में शुरू हुई आरती व पूजा

केदारनाथ के रक्षक के रूप में पूजे जाने वाले भैरवनाथ मंदिर के कपाट मंलवार को भक्तों के लिए खोले जाएंगे। इसके बाद केदारनाथ मंदिर में विधिवत रूप से आरती एवं नित्य पूजाएं शुरू होंगी और बाबा को भोग लगाया जाएगा।  कपाट खुलने के पहले दिन श्री बदरीनाथ-केदारनाथ समिति के सदस्यों, नगर पंचायत व प्रशासन के अधिकारियों के साथ ही तीर्थयात्रियों के जयकारों से बदरीनाथ का पूरा प्रागण गूंज गया। इसके साथ ही हर साल यहां उद्धव-कुबेरजी, शंकराचार्य व अन्य भगवानों के साथ शोभायात्रा भी निकाली जाती है।

प‍ृथ्वी का बैकुंठ है बद्रीनाथ

प‍ृथ्वी का बैकुंठ है बद्रीनाथ

उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित बद्रीधाम को पृथ्वी पर बैकुंठ की संज्ञा दी जाती है। चारधामों में से एक उत्तर हिमालय में स्थित बदरीनाथ धाम को 'मोक्ष धाम' भी कहा जाता है। इस धाम की विशेषता यह है कि इसे हर युग में अलग-अलग नामों से जाना गया है। 

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