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जनता को पसंद है बहुमत वाली सरकार

30 November 2021

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव की सियासी सरगर्मियों के बढ़ने के साथ-साथ राजनीतिक गठजोड़ और सियासी समीकरण भी सेट किए जाने लगे हैं। समाजवादी पार्टी (सपा) के मुखिया अखिलेश यादव राज्य में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से मुकाबला करने के लिए छोटे दलों को अपने साथ जोड़ते हुए एक बड़ा गठबंधन बनाने का प्रयास कर रहे हैं। अखिलेश के साथ खड़े होने वाले जयंत चौधरी, ओम प्रकाश राजभर सहित कई नेता गठबंधन की राजनीति के पक्ष में बोल रहे हैं, तो बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने गठबंधन कर चुनाव लड़ने की संभावनाओं को सिरे से ही खारिज कर दिया है। वैसे राजनीति में राजनीति में कुछ असंभव न होने का तर्क भी दिया जाता है। ऐसा तर्क देने वाले लोग बीते लोकसभा चुनावों में सपा -बसपा के बीच हुए गठबंधन का उदहारण देते हैं। यह गठबंधन चुनावों के तत्काल बाद टूट गया था। ऐसा नहीं है कि बीते लोकसभा चुनावों में ही गठबंधन की राजनीति फेल हुई है।

cm yogi adityanath

आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना को साकार कर रहे विकास दीपोत्सव मेले

29 October 2021

भारत को त्योहारों का देश कहा जाता है। होली, दीपावली, रक्षाबंधन, नवरात्र, ईद, गुरुपूर्णिमा एवं क्रिसमस जैसे अनेक त्योहारों का आयोजन पूरे वर्ष भर चलता रहता है। जिसमें आपसी प्रेम, भाई-चारा, सौहार्द के वातावरण में सभी इसमें आनन्द की प्राप्ति करते हैं। प्रत्येक त्योहार में एक मुख्य आकर्षण होता है त्योहारों से जुड़ी मान्यताओं, परम्पराओं के आधार पर की जाने वाली खरीददारी। प्रत्येक त्योहार पर बाजार ऐसी वस्तुओं से पट जाता है जिनका किसी न किसी प्रकार का जुड़ाव उन त्योहारों से होता है। होली में जहां पिचकारी व रंगो की धूम रहती है तो दीपावली में दिए, लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियों, लाई, बताशा आदि से पूरा बाजार गुलजार हो जाता है। अपनी-अपनी सामर्थ्य एवं आवश्यकता के अन्तर्गत सभी लोग कुछ न कुछ खरीददारी करते हैं। इस प्रकार हर्ष एवं उल्लास का वातावरण बना रहता है।

khadi

खादी बन रही प्रदेश के विकास में सहायक, अब हो रहे नए-नए नवाचार

23 October 2021

‘‘खादी की रजत चंद्रिका जब-आकर तन पर मुस्काती है,तब नवजीवन की नई ज्योति अन्तस्तल में जग जाती है‘‘भारत की आजादी के लिए हुए आंदोलन में खादी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। महात्मा गांधी ने खादी को सामाजिक एवं आर्थिक क्रांति का माध्यम बनाया था। उन्होंने स्वयं भी चरखा चलाकर सूत कातने को अनवरत जारी रखा और साथ ही राष्ट्रपिता गांधी ने भारत के व्यापक जनमानस को भी प्रेरित किया कि वह स्वयं के काते हुए सूत से बने वस्त्ऱ ही पहनें। इस प्रकार राष्ट्र निर्माण के लिए हुए व्यापक संघर्ष में खादी प्रमुख भूमिका में रही। 

cm yogi adityanath

प्रदेश सरकार के वृहद वृक्षारोपण से, प्रदेश में बढ़ रहा है वनावरण

07 July 2021

प्रदीप गुप्ता विश्व में सभ्यता के आरम्भ से ही प्रकृति और उसके विभिन्न स्वरूपों के नजदीक मानव का विकास हुआ है। इन्हीं के अन्तर्गत हमारे देश में भी मानव विकास नदियों, पर्वतों, पेड़-पौधों आदि के सानिध्य में हुआ है। वृक्ष हमारी धरती का श्रृंगार हैं। यह पर्यावरण को स्वच्छ करते हैं। इसीलिए वनों को धरती का फेफड़ा भी कहा गया है। वृक्ष अनेक प्रकार से हमारे लिए उपयोगी हैं। यह न केवल फल, फूल, लकड़ी, औषधि, खाद्य पदार्थों के स्त्रोत हैं बल्कि यह वातावरण से कार्बन डाई आक्साइड को अवशोषित कर ऑक्सीजन की सतत् आपूर्ति से वातावरण को स्वच्छ भी करते रहते हैं। इसके साथ ही वन अनेक पक्षियों, कीड़े-मकोड़ों एवं अन्य जीव-जन्तुओं के लिए प्राकृतिक वासस्थल भी है। हमारे धर्मग्रन्थों में भी पीपल, बरगद, आंवला आदि अनेक वृक्षों की पूजा किए जाने के उल्लेख मिलते हैं। आज विज्ञान भी इसको सत्य सिद्ध करता है कि पीपल का वृक्ष दिन-रात ऑक्सीजन प्रदान करता है।

ashutosh shukla

यूपी के लिए 'UP' योगी

25 June 2021

आशुतोष शुक्ला, सीनियर प्रोड्यूसर, न्यूज 18यूपी में 2022 की बिसात बिछनी शुरू हो गई है। सहूलियत की सियायत में सारी पार्टियां एक दूसरे से आगे निकलने की होड़ में हैं। कोई चुनाव से ठीक पहले अपनी पार्टी छोड़कर दूसरी पार्टी में अपना राजनीतिक भविष्य देख रहा है, तो कई माननीय अपनी पार्टी में अनदेखी बताकर विरोधी पार्टियों के दफ्तर के चक्कर काट रहे हैं। समाजवादी पार्टी के सुप्रीमो अपना सियासी कुनबा बढ़ाने को लेकर दिन रात एक किए हैं। इसके लिए वो बुआ की पार्टी के बागियों पर लगातार डोरे डाल रहे हैं। वहीं, बीएसपी मुखिया मायावती भी कोरोना काल में ट्वीट पॉलिटिक्स से सूबे की सियासत में अपनी सियासी उपस्थिति दर्ज कराती रहती हैं। जिससे कहीं समाजवादी पार्टी और बीजेपी कहीं ये ना समझ लें कि, चुनावी चौसर में मुकाबला सिर्फ उन्हीं दोनों के बीच है।

cm yogi adityanath

कोरोना पर विजय पाती योगी सरकार

17 June 2021

उपेंद्र कुमार वर्ष 2019 के आखिर में जब लोग आगामी वर्ष के सुखद आगमन की कामना कर रहे थे, वहीं चीन के बुहान में सदी की सबसे भयानक त्रासदी का पहला अध्याय लिखा जा चुका था। भारत में कोरोना रूपी दुर्दात आपदा केरल से शुरू होकर उत्तर प्रदेश तक आ पहुंची। ईरान से लौटे गाजियाबाद के एक व्यक्ति को कोरोना संक्रमित पाया गया। जब अमेरिका जैसे विकसित देश की कमर कोरोना महामारी ने तोड़ दी हो तब उत्तर प्रदेश जैसे विशाल आबादी वाले राज्य में कोरोना पर काबू पाने के लिए एक विस्तृत, सृदृढ़ और दीर्घकालीन रणनीति की आवश्यकता के दृष्टिगत प्रदेश के मुख्यमंत्री के नेतृत्व में सरकार ने इस कार्य को बखूबी अंजाम दिया।

international labour day 2021

मुल्क के मुकद्दर को संवारते मजदूर

01 May 2021

दिलीप अरुण "तेम्हुआवाला"भारत के हरियाणा प्रदेश के भाटी माइन्स में काम करने वाले मज़दूर हों या बिहार के कैमूर की तपती पहाड़ी के नीचे पत्थर काटने वाले मज़दूर। उड़ीसा, महाराष्ट्र, गोवा, राजस्थान के बॉक्साइट खदानों में काम करने वाले मज़दूर हों या सांप-बिच्छू के संग खेत-खलिहानों में काम करने वाले मज़दूर। बिहार के भभुआ स्थित भुड़कुड़ा पहाड़ी के खदानों, केरल, हिमाचल प्रदेश, तमिलनाडु, महाराष्ट्र के नमक की खानों में काम करने वाले मज़दूर हों या अंडमान-निकोबार, पुडुचेरी, सिक्किम, लक्ष्यद्वीप, लद्दाख, दादरा-नगर हवेली, दमन-द्वीव, मिजोरम, नागालैंड तथा त्रिपुरा में जद्दोजेहद की ज़िंदगी जीने वाले मज़दूर -  ये सभी अपनी मेहनत की तिल्ली से देश की दहलीज़ पर समृद्धि का दीया जलाते हैं।

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सांसें जरूरी या सियासत?

15 April 2021

आशुतोष शुक्ला, सीनियर टीवी जर्नलिस्टये सच है कि, जब हम अपनों या किसी परिचित के अपनों को खोते हैं, तभी आपको कोविड की गंभीरता का अहसास ज्यादा होता है। वर्ना कोविड केस की संख्या सिर्फ एक नंबर भर है। खास तौर पर हमारे जैसे मीडियाकर्मियों के लिए, जो एक साल से रोज यही बताते और लिखते आ रहे हैं। चाहें ये संख्या लाख में हो या हजारों में। आज दोपहर पता चला कि, लंबे समय तक साथ काम करने वाले साथी सुधीर पांडेय की मां का निधन लखनऊ में कोविड से हो गया है।

mamta banerjee

किस्सा पहियों वाली कुर्सी का

06 April 2021

आनंद श्रीवास्तववरिष्ठ पत्रकारसाल 1977 में रिलीज ‘किस्सा कुर्सी का’ भारतीय सिने इतिहास की सबसे विवादास्पद फिल्म मानी जाती है। इंदिरा गांधी सरकार की चूलें हिला देने से लेकर इमरजेंसी के बाद हुए आम चुनावों तक में यह फिल्म बड़ा मुद्दा बनी। 1974 में बनी अमृत नाहटा की इस फिल्म पर 1975 में इमरजेंसी के दौरान बैन लगा दिया गया। प्रिंट तक जब्त कर लिए गए/जला दिए गए। आरोप था कि इस फिल्म में इंदिरा गांधी के साहबजादे संजय गांधी की सपनीली ‘मारुति’ कार का माखौल उड़ाया गया था।

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नवनिर्माण के ‘अटल’ पथिक

25 December 2020

हरीशचंद्र श्रीवास्तव  (लेखक भारतीय जनता पार्टी उत्तर प्रदेश के प्रवक्ता हैं।)भारत देश का सूर्य पुनः उगने का वह समय जब सन 1947 में देश को स्वतंत्रता मिली, तब 23 वर्षीय एक कवि हृदय युवा आधुनिक विराट भारत के सपने को बुनते हुए गीत गा रहा था ‘पंद्रह अगस्त का दिन कहता, आजादी अभी अधूरी है, सपने सच होने बाकी हैं, रावी की शपथ न पूरी है।’ यही युवा संसार में अटल बिहारी बाजपेयी के रूप में विख्यात हुआ। यही वह समय था, जब सत्ताशीर्ष पर बैठे एक व्यक्ति के मनमौजीपन व नासमझी के कारण देश के एक महत्वपूर्ण भाग कश्मीर के एक भाग शत्रु देशों के हाथ में जाने, संसदीय परंपराओं के साथ छल करके शेष कश्मीर में अलगाववादी धारा 370, 35-ए थोपने, विकास नीति के स्थान पर परिवारवाद की नीति को शासनतंत्र का भाग बनाने का पाप करने आदि अनेक पच्छगामी घटनाएं हो रही थीं, तब इस युवक के ये शब्द ‘आग्नेय की इस घड़ी में आइये अर्जुन के जैसे उद्घोष करें, ‘न दैन्यं न पलायनम्’, जनता में आशा का संचार कर रहे थे।

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