कंप्यूटर को गुरु मानकर शतरंज का उस्ताद बना 9 साल का सेल्वा

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शतरंज की बिसात को समझना हर किसी के बस की बात नहीं। यह वह खेल है, जिसके लिए आपको दिमागी कसरत करनी पड़ती है। एक बाजी जीतने के लिए कई बाजियां हारनी पड़ती हैं और फिर सीख के आगे बढ़ना पड़ता है। 

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