मजबूरी ने बनाया भिखारी, अब सिग्नल स्कूल ने दिखाई जीने की राह

फोटो: thebetterindia

मोहन के पिता जो गांव में एक ही पैर के सहारे सारा खेत जोत देते थे, यहां अपाहिज कहलाये जाने लगे और उन्हें कोई काम देने को तैयार न हुआ। पर परिवार का पेट तो पालना था! सो, इस मेहनती किसान ने हाथ में कटोरा थाम लिया और अपने स्वाभिमान को कुचलकर भीख मांगने लगा। मोहन, उसके दोनों भाई और मां, फूलों के गजरे बना बना कर तीन हाट नाका पर बेचने लगे।

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