बानू शेख सफी: कचरा बीनने से लेकर नर्स बनने तक की कहानी

फोटो: Symbolic

महाराष्ट्र के यवतमाल जिले के रविदास नगर की रहने वाली बानू जब सिर्फ तीन साल की थी तब उनके पिता का देहांत हो गया। जब बच्चे अपने जीवन का पहला पाठ पढ़ते है, उस उम्र में बानू को जिंदगी ने  कई सबक एक साथ सिखा दिए। नन्ही सी बानू को अपने परिवार का पेट पालने के लिए अपनी मां और डेढ़ साल की छोटी बहन, शमा के साथ कचरा बीनने का काम शुरू करना पड़ा।

आगे पढ़ें

कमेंट्स लिखें